हर साल निकलते हैं 300 से ज्यादा, फिर भी शहर में नहीं दे रहे टीबी यूनिट

-सुखतवा यूनिट के अंतर्गत शामिल है शहर
-अस्पताल प्रबंधन ने भेजा है प्रस्ताव

इटारसी। इटारसी रेल जंक्शन होने से शहर मेें हर दिन लाखों लोगों की आवाजाही होती है। इन लोगों में कई लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें टीबी की बीमारी होती है। ऐसे लोगों से टीबी की बीमारी का संक्रमण शहर में भी फैलता है। हर साल शहर में 300 से ज्यादा टीबी के मरीज सामने आते हैं। बावजूद उसके स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इटारसी शहर में टीबी यूनिट नहीं खोल पाए हैं।
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ुसुखतवा में खुली, इटारसी वंचित
स्वास्थ्य विभाग ने टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत टीबी यूनिट की स्थापना सुखतवा में की गई थी। वर्ष 2002 में यह यूनिट खोली गई थी। यहां 2 कर्मचारियों का स्टाफ स्वीकृत हुआ था जिनमें से एक ट्रीटमेंट प्रोवाइडर और दूसरी लैब सुपरवाइजर की पोस्ट थी। आदिवासी ब्लॉक के साथ ही यहां टीबी के मरीज होने की संभावनाएं होने के चलते यह यूनिट स्थापित की गई थी। उस वक्त भी इटारसी यूनिट पाने से वंचित रह गई थी।
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इटारसी में है ज्यादा जरुरत
अभी शहर में टीबी नियंत्रण का पूरा कार्य सुखतवा यूनिट के अंडर में चल रहा है जबकि इटारसी शहर में पृथक टीबी यूनिट की नितांत आवश्यकता है। शहर की करीब १.२5 लाख की आबादी के साथ आसपास के गांवों के लोगों के अलावा केसला ब्लॉक के करीब 100 गांव भी उपचार सुविधा के लिए इटारसी के शासकीय अस्पताल पर निर्भर हैं।
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यह क्षेत्र हैं ज्यादा संवेदनशील
टीबी बीमारी के लिहाज से शहर में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां टीबी के मरीज हर साल निकलते हैं। इनमें नाला मोहल्ला, बारह बंगला, न्यू गरीबी लाइन, पीपल मोहल्ला, बंगलिया, गोंडी मोहल्ला प्रमुख इलाके हैं जो टीबी के हिसाब से संवेदनशील हैं। शासन टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए करोड़ों का बजट देती है फिर भी टीबी खत्म नहीं हो रही है। हर साल शहर में 300 से ज्यादा मरीज इस बीमारी के निकलना अपने आप में बड़ा सवाल है।
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एक महीने पहले फिर की डिमांड
इटारसी शहर में टीबी यूनिट की नितांत आवश्यकता महसूस हो रही है। वर्ष 2002 से सुखतवा यूनिट के अंतर्गत चल रहे टीबी कार्यक्रम को अब अगले से संचालित करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने इसी वर्ष जनवरी महीने में शासन को भेजा गया है। वहां से इसे दिल्ली भेजा गया है।
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यह होगा फायदा
इटारसी में टीबी यूनिट की स्वीकृति होने से टीबी नियंत्रण कार्यक्रम में जहां गति आएगी वहीं शहर के जरुरतमंद मरीजों को यूनिट में ही बेहतर उपचार मिल सकेगा। यूनिट के खुलने से सीबी नॉट मशीन मिलने की भी संभावना बनेगी। इस मशीन के आने से जरुरतमंद मरीजों को जांच के लिए 5 से 6 हजार रुपए की जांच कराने आर्थिक बोझ नहीं सहना पड़ेगा। इस मशीन से वह जांच निशुल्क हो जाएगी।
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कब कितने निकले मरीज
वर्ष 2019-३५५
वर्ष 2018-३०७
वर्ष 2017-३०२
वर्ष 2016-३४३
वर्ष 2015-३४४
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इनका कहना है
निश्चित रूप से इटारसी शहर के लिए टीबी यूनिट की आवश्यकता है। हमने पिछले दिनों इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इसका निर्धारण वरिष्ठ कार्यालय से ही होगा।
डॉ एके शिवानी, अधीक्षक डीएसपीएम अस्पताल

इटारसी बड़ा शहर होने के साथ ही टीबी के लिहाज से संवेदनशील भी है। हमने वहां के लिए टीबी यूनिट को स्वीकृति देने का प्रस्ताव भेजा हुआ है। यह प्रस्ताव दिल्ली जाएगा और वहीं से इस पर निर्णय होगा। अगर इसे स्वीकृति मिल जाती है तो जरुरतमंद लोगों के लिए बड़ी सुविधा हो जाएगी।
डॉ एसके पुरोहित, जिला क्षय अधिकारी होशंगाबाद

Rahul Saran Reporting
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