पांच साल में 94 लाख से बढक़र चार करोड़ रुपए हो गया विधानसभा चुनाव का खर्च

पांच साल में 94 लाख से बढक़र चार करोड़ रुपए हो गया विधानसभा चुनाव का खर्च

Rakesh Kumar Malviya | Publish: Oct, 13 2018 04:22:40 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 04:22:41 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में जहां जिला निर्वाचन विभाग को 94 लाख रुपए का खर्चा आया था। वहीं इस साल 3 करोड़ 93 लाख रुपए की डिमांड करना पड़ी

बैतूल. वर्ष 2013 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के बाद बीते पांच सालों में महंगाई सातवें आसमान पर पहुंचे गई है और इसका असर इस बार चुनाव प्रक्रिया पर साफ नजर आ रहा है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में जहां जिला निर्वाचन विभाग को 94 लाख रुपए का खर्चा आया था। वहीं इस साल 3 करोड़ 93 लाख रुपए की डिमांड करना पड़ी है। यानि पांच सालों में निर्वाचन के बजट की राशि में तीगुनी से ज्यादा वृद्धि हो चुकी हैं। महंगाई को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की सीमा भी बढ़ाकर दोगुनी कर दी है। अब प्रत्याशी २८ लाख रुपए तक चुनाव प्रचार में खर्चा कर सकेंगे।

जिला निर्वाचन ने 3.93 करोड़ की डिमांड
जिले की पांचों विधानसभाओं में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए इस साल जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा 3 करोड़ 93 लाख 16 हजार रुपए की डिमांड मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय भोपाल से की गई थी। जिसके एवज में जिला निर्वाचन कार्यालय को 2 करोड़ 36 लाख 7 हजार 178 का बजट मिला है। जबकि शेष बजट बाद में दिया जाएगा। यह बजट निर्वाचन संबंधी कार्यो के लिए खर्च किया जाना है। बजट की राशि का नगद भुगतान न होकर ई पेमेंट द्वारा किया जाएगा।

महंगाई के कारण तीन गुना हुआ खर्च
वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव को संपन्न कराने में जिला निर्वाचन कार्यालय को कुल 94 लाख 55 हजार रुपए का खर्चा आया था, लेकिन इन बीते पांच सालों में महंगाई इतनी बढ गई की इसके कारण यह खर्च तीगुना से ज्यादा हो गया है। जानकारी के अनुसार इसके पीछे बड़ा कारण मतदान केंद्रों एवं कर्मचारियों की संख्या में इजाफा होना, वहीं पेट्रोल और डीजल के दाम बढऩा और बढ़ती महंगाई का असर है। जिसके कारण निर्वाचन के बजट में भी बढ़ोत्तरी हुई है।

कर्मचारियों के भत्ते का खर्च अधिक
2018 विधानसभा चुनाव के लिए जिला निर्वाचन विभाग द्वारा जो बजट की डिमांड की गई है उसमें सर्वाधिक व्यय चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों के यात्रा-भत्ते एवं परिवहन पर होने वाला खर्च बताया गया है। इसके लिए निर्वाचन विभाग द्वारा करीब 1.40 करोड़ का प्रावधान बजट में किया गया है। इसके अतिरिक्त परिवहन पर 4.84 लाख और पेट्रोल-डीजल के व्यय पर 5.30 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। जबकि डाक-तार खर्च के लिए महज 10 हजार रुपए का बजट निर्धारित है।

प्रत्याशियों के लिए चुनावी खर्च की सीमा भी दोगुनी हुई
निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के लिए चुनावी खर्च की सीमा 28 लाख निर्धारित कर दी है। वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में खर्च सीमा महज 16 लाख निर्धारित की गई थी। जिसे निर्वाचन आयोग ने इस चुनाव में बढ़ाकर दोगुना कर दिया है, इसका हिसाब प्रत्याशियों को अपने चुनावी व्यय ब्यौरे में देना होगा। मतदान केंद्र के बाहर प्रत्याशियों के द्वारा लगाने वाले टेन्ट का खर्च भी प्रत्याशियों के खाते में जोड़ा जाएगा। वहीं विधानसभा निर्वाचन 2018 में सभी प्रत्याशियों को नामांकन जमा करने के साथ ही शपथ पत्र जमा करना होगा। जिसमें उनके विरूद्ध यदि प्रकरण दर्ज हैं, तो उसका पूर्ण रूप से उल्लेख करना होगा। फार्म में सभी कॉलम भरना अनिवार्य है।

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