scriptNarmda Sethai Ghat Hoshangabad and Maheshwar comparison | सेठानी घाट कैसे बेहतर बनेगा, जबलपुर और महेश्वर से सीखना होगा | Patrika News

सेठानी घाट कैसे बेहतर बनेगा, जबलपुर और महेश्वर से सीखना होगा

नर्मदा के सबसे पुराने बड़े पक्के घाटों में से एक सेठानी घाट पर महिलाओं को वस्त्र बदलने के चेंजिंग रूम तक नहीं

होशंगाबाद

Published: October 21, 2021 11:47:19 pm

होशंगाबाद. प्रदेश के पक्के घाट वाले नर्मदा तटों में होशंगाबाद का सेठानीघाट, अमरकंटक, जबलपुर ग्वारीघाट, महेश्वर, मंडला महाराजपुर और नरसिंहपुर के बरमान घाट शामिल हैं। सरकार इन घाटों को पर्यटन स्थल का स्वरूप देने के दावे कर रही, लेकिन खास सुविधा नहीं होने से धार्मिक कर्मकांड और नर्मदा स्नान से आगे बात नहीं बढ़ पा रही। अब 142 साल पुराने होशंगाबाद के सेठानीघाट को ही लें तो यहां बेजा गंदगी पसरी है। 2020 की बाढ़ में चेंजिंग रूम बहने के बाद फिर नहीं बने। अब नर्मदा स्नान को आने वाली महिलाएं खुले में कपड़े बदलकर शर्मिंदा होती हैं, कार्तिक माह में भी ऐसा ही होगा। यूं महिलाओं के लिए अलग से विवेकानंद घाट की व्यवस्था है, पर वहां यह देखने वाला तक नहीं है कि पुरुषों की एंट्री बैन रहे। सौ मीटर लंबे सेठानी घाट के नर्मदा तट के साथ सात घाट और 100 मंदिर हैं, जहां तीज-त्योहारों, स्नान पर्वों पर हजारों लोग पूजन-दर्शन और स्नान के लिए पहुंचते हैं। संभागीय मुख्यालय की नगरपालिका परिषद घाटों का संचालन करती है, लेकिन नियमित साफ-सफाई के मामले में स्थिति बेहद खराब है। पत्थर के सुंदर और विशाल घाट पर नदी किनारे कचरा नहीं उठता, जबकि नपा ने अलग से तीन शिफ्ट में नौ सफाईकर्मी तैनात कर रखे हैं। ऐसे में कलात्मक बेजोड़ पत्थरों से बना घाट मरम्मत और रखरखाव के अभाव में चमक खो रहा है।
Narmda Sethai Ghat Hoshangabad
सेठानी घाट कैसे बेहतर बनेगा, जबलपुर और महेश्वर से सीखना होगा
Bollywood film shooting in Maheshwar
IMAGE CREDIT: patrika
--होशंगाबाद क्या सीखे महेश्वर से--
मां अहिल्या की नगरी महेश्वर पर्यटकों और फिल्मकारों को साफ स्वच्छ तट पर आमंत्रित करती है। यह शहर अभी नगर पंचायत है, इसलिए आय का स्रोत खुद ही ढूंढा है। पर्यटकों की पार्किंग के सालाना ठेके और आसपास पटरी पर दुकान लगाने वालों से होने वाली करीब 30 लाख रुपए की आय इसी पर खर्च होती है। महेश्वर में 5 सफाईकर्मी, 5 गोताखोर और एक घाट प्रभारी 18 घंटे तक घाट पर सतत तैनात रहते हैं। घाट से कमाने वाले नाविक एवं फोटोग्राफर भी आय का कुछ हिस्सा तो इस पर खर्च करते ही है, हर महीने सफाई अभियान चलाते हैं। स्थानीय प्रशासन भी सामाजिक संगठन और आम लोगों को साथ लेकर स्वच्छता अभियान चलाता है। नगर मां नर्मदा के प्रति आस्थावान है, रोज 1000 से अधिक लोग मां नर्मदा को दुग्ध अभिषेक भी करते हैं। तट पर मछलियां मारना अपराध है, इससे बड़ी-बड़ी मछलियां मिलती है, जो पानी की शुद्धता में भी सहायक हैं। आटे के दीए से दीपदान सिर्फ पत्तों पर होता है। फूल मालाएं या अन्य सामग्री नदी में डालने की मनाही है। इसके लिए तट पर ही इसे अलग रखने की जगह बनी हुई है, इसकी नागरिक खुद ही पालना करते और करवाते हैं।
Narmda Sethai Ghat Hoshangabad
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होशंगाबाद में घाट पर क्या-क्या परेशानी
-बारिश के दौरान जलस्तर बढऩे से सेठानी घाट के मुख्य हिस्से पर तो सफाई कर दी, लेकिन नाव घाट, पर्यटन घाट, मंगलवारा घाट पर अभी भी मिट्टी जमा। श्रद्धालु एक घाट से दूसरे घाट की ओर नहीं जा पा रहे।
- इतने बड़े घाट पर सिर्फ तीन कूड़ेदान, जब कूड़ेदान हीं नहीं होंगे तो लोग कचरा डालेंगे कहां।
- पर्यटन घाट से नर्मदा में मिलने वाला नाला बंद नहीं हुआ।
- सेठानी घाट पर आवारा जानवरों को रोकने की व्यवस्था नहीं। मवेशी घाटों पर घूमते हैं।
- प्रतिमा विसर्जन के बाद स्थिति और बदहाल। सेठानी घाट पर अभी प्रतिमाओं के अवशेष दिख रहे।
Narmda Sethai Ghat Hoshangabad
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सेठानीघाट में यह बदलाव की जरूरत
-घाट पर नए सिरे से वाहन की पार्किंग विकसित हो। पेड पार्किंग से नपा को आय भी होगी और घाट की सुविधाएं भी बढ़ेगी। वाहन चोरी भी रुकेंगी।
-सड़कों से पूजनसामग्री की दुकानों को नपा के रैन बसेरे कॉम्प्लेक्स स्थित दुकान में शिफ्ट किया जा सकता है। नपा इनसे रोज बैठकी शुल्क वसूलती है इसके बजाए मंथली जगह का किराया तय करके सभी दुकानों को एक जगह व्यवस्थित किया जा सकता है।
-बाहर से आए सैलानियों, स्नानार्थियों के रात ठहरने के लिए घाट पर तिलक भवन, धर्मशाला, रैन बसेरा है इसे फिर से पलंग, बिजली-पानी, चौकीदार-सुरक्षा गार्ड के इंतजाम कर शुरू कराए जा सकते हैं।
-सेठानी घाट पर वोटिंग की सुविधा नहीं है। वोटिंग का ठेका देकर पर्यटकों के लिए सुविधा बढ़ेगी तथा आय का जरिया बढ़ेगा।
-पक्के घाटों के बेहतर संचालन और देखरेख के लिए नए सिरे से संचालन समितियां बनें, जो रोज या साप्ताहिक साफ-सफाई के साथ घाट पर स्नानार्थियों को आवश्यक सुविधाएं जुटा सके।
-घाट पर प्रतिबंध के बाद भी पॉलीथिन उपयोग होता है। दुकानदार और ग्राहक दोनों ही इसके उपयोग-बिक्री नहीं करने के प्रति लापरवाही बरत रहे। घाट पर आटे की दीए और कागज के दोने की ही बिक्री और उपयोग को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
-मुख्य सेठानीघाट पर तो मछली मारने के प्रतिबंध पालन होता है, लेकिन आजू-बाजू के हिस्से में लोग वंशी और गल डालकर मछली मारते हैं। जाल का भी उपयोग होता है। इस पर पूर्णत: रोक लगे।
-जो स्वयंसेवी संगठन घाटों की प्रति रविवार सफाई करते हैं, उनके अभियान में नपा का सफाई अमला भी जोड़ा जाए तो रोजाना जमा होने वाला क्विंटलों पूजन सामग्री, कपड़े अन्य तरह का कचरा साफ हो सकता है। घाट स्वच्छ बने रहेंगे।
Narmda Sethai Ghat Hoshangabad
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विशेषज्ञ की नजर से ऐसा हो घाट
सेठानीघाट की लंबाई और ऊंचाई महेश्वर घाट से ज्यादा है, हालांकि महेश्वर घाट सुंदर कलात्मक है। परंतु हम सेठानीघाट के इतना चौड़ा होते हुए भी आजू-बाजू के हिस्से को गंदगी और लाइट की सुविधा नहीं होने से कनेक्ट नहीं कर पा रहे। अगर इसका सौंदर्यीकरण मंगलवारा से कोरीघाट तक करें तो एक कम्पलीट घाट हो जाएगा, लोगों की पहुंच आसानी हो सकेगी। एकरूपता व पक्की सड़क-पाथवे बनने से घूमने में दिक्कत नहीं होगी। महेश्वर घाट की तरह सेठानीघाट पर भी लाइट एंड साउंड शो के आयोजन भी कर सकते हैं। पूरे घाट को एक जैसा रंग संयोजन, फोकस लैंपों से प्रकाशित किया जाए। सभी मंदिरों एक ही कॉरीडोर से जोड़ा जाए। इससे सेठानीघाट पर पर्यटन बढ़ेगा और निरतंर आवाजाही से गंदगी दूर होगी।
-अमित पाराशर, आर्किटेक्ट होशंगाबाद
शहर के मुख्य सेठानीघाट को आसपास के अन्य घाटों और यहां के मंदिरों से एक साथ जोड़कर कॉरीडोर बनाने की योजना तैयार कर रहे हैं। मुख्य फोकस घाटों के सौंदर्यीकरण व इन्हें धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने पर है। महेश्वर घाट की अध्ययन रिपोर्र्ट भी बुलाई जाएगी। नपा अधिकारियों को घाट की नियमित साफ-सफाई व लोगों की सुविधाएं उपलब्ध हो इसके लिए निर्देश दिए गए हैं।
-नीरज कुमार सिंह, कलेक्टर होशंगाबाद

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