सोशल मीडिया तक सिमटी युवाओं की लेखनी, कैसे बनेंगे युवा लेखक

साहित्यिक अकादमी, संस्कृति विभाग लेखकों के लिए कार्यशाला से कर रहा प्रोत्साहित

By: poonam soni

Updated: 10 Apr 2019, 01:22 PM IST

होशंगाबाद. आज के दौर में युवाओं की लेखनी सोशल माध्यमों तक की सीमित रह गई है। उनके पास ना सोचने का समय और पढऩे का। इस कारण युवा लेखकों की संख्या लगातार कम हो रही है। यह कहना है शहर के लेखकों का जो युवाओं को एक अच्छे लेखक के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनका कहना है कि लेखन के क्षेत्र में जाने के लिए विषय का अध्ययन, अनुभव का चिंतन करना जरूरी होता। हलांकि इन सबके बीच आज भी शहर के कई युवा लेखक अध्ययन कर किताब लिखने के लिए प्रयासरत हैं। आज युवा लेखक प्रोत्साहित दिवस पर उन युवाओं और प्रोत्साहित करने वाले लेखकों से रू-ब-रू कराएगें।
यह हैं जाने-माने लेखक
डॉ. कृष्ण गोपाल मिश्र 36 सालों से लेखन कार्य कर रहे हैं। इनकी ५६ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनका कहना है कि लेखक अध्ययन और अनुभव से मिलकर बना होता है। इन्होंने अध्ययन दर्शन उसको करेंट इश्यू के साथ जोडऩा और शोध परख लेखन, कालीदास के समय का इतिहास, रामचरित मानस, हिंदी साहित्य, भारतीय साहित्य पिता, भारतीय साहित्य माता, महाकाव्य सहित अन्य पुस्तकें लिख चुके हैं।
डॉ. सुधीर दीक्षित युवा लेखकों को प्रोत्साहित करने का काम कर रहे हैं। इनका कहना है कि आज के युवाओं के पास पढऩे व अध्ययन करने के लिए समय की कमी है। इनकी लेखनी को बढ़ावा मिलेगा तो ही आगे बढ़ेंगे। डॉ. सुधीर अब तक हैरीपॉटर, सिक्रेट इंग्लिश सहित २५० पुस्तकों को इंग्लिश से हिंदी में ट्रांसलेट कर चुके हैं। इन्होंने अपनी शुरूआत रिव्यू के साथ की थी।

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