National Grand Parents Day : इस गांव में दादा की जिद से पहली बार गांव से पढऩे बाहर निकली थी पोतियां

National Grand Parents Day : इस गांव में दादा की जिद से पहली बार गांव से पढऩे बाहर निकली थी पोतियां

poonam soni | Publish: Sep, 09 2018 12:28:06 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

गांव वाले कहते थे- क्या करेंगी पढ़कर, चूल्हा-चौका ही तो संभालना है

होशंगाबाद. यह दादा-दादी की ही जिद थी कि उनकी पोतियां पढ़-लिखकर समझदार बनें। दादा ने उन्हें गांव से बाहर स्कूल पढऩे भेजने का फैसला किया तो गांव वाले बोले- क्या करोगे, पढ़ा-लिखाकर कर। इन्हें चूल्हा-चौका ही तो करना है। लेकिन उन्होंने जिद नहीं छोड़ी और पोतियों को साइकिल चलाना सिखाया, जिससे वे गांव से बाहर पढऩे गई। आज उनकी पोतियां भी बाल-बच्चों वाली हैं, लेकिन दादा से आज भी माता-पिता से ज्यादा प्यार करती हैं। वैसे तो हर संयुक्त परिवार में माता-पिता से ज्यादा लाड़-प्यार दादा-दादी से मिलता है। लेकिन जीवन की इस आपाधापी में अब संयुक्त परिवार कम ही बचे हैं।

दादा-दादी हैं फिर चिंता कैसी
शांति नगर में रहने वाले डॉ. विजया देवास्कर की बेटी आप्ती देवास्कर जो अपने माता-पिता से ज्यादा दादा-दादी के करीब है। आप्ती की आजी उषा देवास्कर बताती है कि उनकी पौती स्कूल जाते वक्त भी दादी से तैयार होती है। उसकी मम्मी ऑफिस जाती है तो बोलती है आप जाओं आजी-आजोवा है हमारे पास। आप्ती कहती है-मुझे सबसे ज्यादा दादा-दादी प्यार करते है, सारी चीजें दिलाते है।

अपने पोते-पोतियों को पहुंचाया मुकाम पर
चंद्रपुरा गांव के लालता प्रसाद चौधरी बताते हैं- अब जमाना बदल गया है। हमारे दौर में लड़कियां स्कूल नहीं जाती थी। मैं, ग्राम सेवा समिति से जुड़ा था, तब भेद के बारे में जाना है। तब पहली बार फैसला किया कि अपने घर की लड़कियों को पढ़ा लिखाकर शिक्षित बनाऊंगा। शुरूआत घर की पोतियों से की। उन्हें भी पौतों के साथ पढऩे स्कूल भेजने का निर्णय लिया। गांव में स्कूल था नहीं। इस कारण गांव से बाहर भेजा। बढ़ी हुई तो साइकिल चलाना सिखाया, जिससे स्कूल जाने लगी। तब गांव वाले कहते थे- पराया धन है, क्या करोगे पढ़ा-लिखाकर। ज्यादा है तो उतना पढ़ा दो कि चि_ियां पढ़ सकें। लेकिन उन्होंने गांव के लोगों की बातों को नजरअंदाज कर सपना पूरा किया। आज भी उनका संयुक्त परिवार है जिसमें 15 सदस्य है। इनकी पोतियां सक्षम और अपना स्वसहायता समूह चलाती है। सब दादा की लाड़ली हैं।

National Grand Parents Day

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