National Eagle Save Day: डाइक्लोफेनेक सोडियम नामक कीटनाशक दवाओं से घट रही बाज की संख्या

डाइक्लोफेनेक सोडियम नामक कीटनाशक दवाओं से घट रही बाज की संख्या

By: poonam soni

Updated: 10 Jan 2019, 04:22 PM IST

होशंगाबाद। पक्षियों की अठखेलिया किसे रास नहीं आती है। आज इगल सेव डे है, इगल सेव होने की जगह विलुप्त होते जा रहे हैं। जिला समन्वयक जैवविविधता आर.आर सोनी ने बताया कि 1200 मीटर आसमान की उठान भरकर शिकार करने वाला पक्षी बाज की संख्या कीटनाशक दवाओं के घटती जा रही है। पहले बाज और गिद्ध की 80 से अधिक प्रकार की प्रजातियां हुआ करती थी, जो घटकर ५ प्रकार की रह गई है। बाज की प्रजाति न के बराबर हैं, लेकिन जंगलों में कॉमन इगल देखने को मिल जाते हैं। वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञों ने बताया कि शहर में कप्पासी बाज देखने को मिलता है। और इनकी संख्या के घटने का कारण जानवर और इंसानो को दर्द से राहत देने वाली दवाएं है, जिसे अनाज में रखे जाने वाली कीटनाशक दवाईयां जो पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहीं हैं।

-डाइक्लोफेनेक सोडियम सबसे खतरनाक
मनुष्य या पशुओं को जो दर्द निवारक दवा दी जाती है। उसमें डाइक्लोफेनेक सोडियम होता है। ज्यादातर डाइक्लोफेनेक दवा का उपयोग गाय का दूध की मात्रा बढ़ाने में किया जाता है। इस दवा की मात्रा इंसान या पशु के टिश्यु में रह जाती है। मवेशी की मौत होने के बाद उसे नदी के किनारे डाल दिया जाता है जिसका शिकार बाज या गिद्ध करता है। इसका रसायन पक्षी के शरीर में पहुंचता है। डाइक्लोफेनेक सोडियम पक्षीयों के लिए टॉक्सिन का काम करता है और उनके लीवर पर असर डालता है इससे इनकी मौत हो जाती है।

इस तरह के इगल पाए जाते हैं
भारतीय गिद्ध, सफेद तलपृष्ठ वाला गिद्ध, पलास की मच्छी, माट चील, ब्राम्हनी चील, बोनेला चील, काली चील, मदकारें, मच्छभंगा, ब्राम्हनी चील, मौरेगी, पहाड़ी बाज, ताज शाह बाज, शिकरा, कुतार, पाइड हैरियर, छोटी उंगली की चील, दस्तमल, इजिर्वव्शयन वल्चर, तीसा सफेद आंख वोला बजार्ड, चित्तीदारचील, कप्तानी चील, लग्गार फाल्कों, दौरेला मोरासनी, तुरूमती, करोंतिया, शाहीन ओस्प्रे, डोंगरा चील, स्टैपी इगल, ओकाब, ग्रिफान गिद्ध।

poonam soni
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned