Get सेफ GO: नर्मदापुरम संभाग के उद्योगपति ने कहा...लॉकडाउन के बाद उद्योग शुरू करना दोबारा सेटअप करने जैसा- देखें वीडियो

Get सेफ Go अभियान में नर्मदापुरम संभाग के उद्यमियों और व्यापारियों ने Video कांफ्रेंसिंग पर की चर्चा

By: poonam soni

Published: 18 Apr 2020, 09:26 PM IST

होशंगाबाद. नर्मदापुरम संभाग कृषि आधारित है। इसलिए यहां के उद्योग भी इसी पर आधारित हैं। लॉकडाउन के चलते यहां काम जरूर बंद हैं लेकिन उद्योगपति अब भी निराश नहीं हुए हैं। सभी का कहना है कि पहली प्राथमिकता कोरोना महामारी के इस संकटकाल से निपटने की है। पत्रिका की वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए सभी ने सरकार से साथ मांगा ताकि लॉकडाउन के बाद उद्योग व्यवसाय फिर से पटरी पर
लौट सके।

यह भी आए सुझाव..
लॉकडाउन पीरियड के अलावा एक माह के लिए शासन शून्य घोषित करे तो ब्याज माफ होगा। क्योंकि काम बंद होने के कारण कर का निर्धारण नहीं होगा। इससे एमएसएमई स्वयं को पुर्नजीवित कर सकेगा। केंद्र राज्य मिलकर जीएसटी की आधी राशि चुकाएं, इससे उद्योगपति को राहत मिलेगी।
उद्योग और व्यापार के लिए एक राहत पैकेज उपलब्ध कराया जाए। लॉकडाउन के बाद लेबर को वापस लाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

पत्रिका का आभार
लॉकडाउन के दौरान उद्योगों को पटरी पर लाने के लिए पत्रिका के 'गेट सेफ गोÓ अभियान को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में मौजूद सभी ने आभार जताया।

क्या बोले उद्योगपति
शासन करे अतिरिक्त फंड की व्यवस्था
&लॉकडाउन के बाद उद्योग शुरू करना दोबारा शुरू करने जैसा रहेगा। इसके लिए यदि शासन एक फंड की व्यवस्था कर दे जिसमें वित्तीय संस्था के स्थायी पूंजी निवेश से 25 प्रतिशत राशि को कम ब्याज दर कम से कम 5 साल और अधिक से अधिक 10 साल के लिए दे तो शासन पर भार भी नहीं आएगा और चुकाने की गारंटी उद्योगपति लेगा।
ब्रज आशीष पांडे, अध्यक्ष, जिला उद्योग संघ बैतूल

लेबर के साथ परिवहन व्यवस्था पर ध्यान हो
वर्तमान में सभी इंडस्ट्रीज बंद हो चुकी हैं, उन्हे दोबारा शुरू करने में परेशानी आएगी। इसलिए बिजली के फिक्स चार्ज में कुछ छूट मिलना चाहिए। सरकार के लिए ब्याज भी माफ करना चाहिए। उद्योगों को पटरी पर लाने के लिए लेवर के साथ परिवहन व्यवस्था भी पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि किसी भी उद्योग को चलाने के लिए यह दोनों महत्वपूर्ण होते हैं।
उदित माहेश्वरी, शुगर और राइस मैन्यूफेक्चरर, पिपरिया होशंगाबाद

बिजली का फिक्स चार्ज खत्म हो
लॉकडाउन के दौरान बिजली का फिक्स चार्ज खत्म होना चाहिए। वहीं समर्थन मूल्य पर हो रही खरीदी क्वालिटी के आधार पर होना चाहिए। इसके बंधन से व्यापारियों को मुक्त रखना चाहिए। सरकार चाहती है कि आवश्यक वस्तुओं की फेक्टरी चालू रहें लेकिन कर्मचारियों को पास की व्यवस्था बनाना चाहिए।
सतीश सांवरिया, डायरेक्टर सांवरिया कंज्यूमर लिमिटेड इटारसी

पहले से परेशान हैं उद्योगपति
उद्योगपति पहले से परेशान हैं। लॉकडाउन के कारण स्थिति और बिगड़ गई है। अभी उद्योग नहीं बचाए गए तो आगे चलकर परेशानी होगी। इसलिए भाषण और ज्ञान की जगह हमारे राजनेताओं को इस दिशा में काम करना चाहिए। इसके पहले हमारी प्राथमिकता इस हालात से निकलना है।
सुखदर्शन सिंह, प्रवक्ता, बैतूल जिला उद्योग संघ

जीएसटी का स्लैब फिक्स हो
जीएसटी का स्लैब फिक्स किया जाए। लॉकडाउन के कारण काम बंद होने से लेबर की सैलरी इस समय बड़ी समस्या है। जिससे उबरने में कई छोटे उद्योगपति परेशानी में हैं। सरकार इस बारे में सोचे और इसका हल निकाले। इसको लेकर हम काफी चिंतित हैं।
सलमान पटेल, फैक्ट्री संचालक बैतूल

प्रत्येक व्यापार झेल रहा ब्याज की मार
देश का 70 प्रतिशत रोजगार एमएसआई, मध्यम उद्योग, कुटीर और लघु और मझोले उद्योगों से ही होता है। इन दिनों प्रत्येक व्यापार ब्याज की मार झेल रहा है। इसलिए शासन अपने स्तर पर पहल करे, उद्योग अपने स्तर पर काम करें। आवश्यक छूट दें। तभी उद्योग पटरी पर आ पाएंगे।
विपिन अग्रवाल,सदस्य, शुगरमिल एसोसिएशन हरदा

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