कविता कोना : पानी....

कविता कोना : पानी....

By: sandeep nayak

Published: 02 Sep 2020, 07:15 PM IST

अहम और वहम
का चढ़ा पानी
बाढ़ के पानी जैसा
और उतर जाए,
फिर देखो मजा आ जाए
बाढ़ का पानी
नही देखता जिंदगानी
उसकी बस रवानगी,
अहम का भी यही हाल
वहम का उससे बुरा हाल,
क्या लाए हैं, क्या ले जाएंगे
सदियों से सुनते आए हैं,
फिर भी हम क्यों पालें अहम
फिर क्यों पनपने दें वहम।
आओ मिलकर लिखें नया
मैत्री का इतिहास,
हरपल हर समय खुश रहें
ऐसी हो इबारत का यह इतिहास।
सब यादें सब समय की
वो बातें आती हंै काम की
जब थे बहुत ही करीब
था नारा ना कोई अमीर ना कोई गरीब।
बस और बस थी सच्ची मित्रता
जो थी मशहूर।

कवि.....राजेन्द्र प्रसाद नामदेव

(पत्रिका नवोदित कविता लेखकों को प्रोत्साहित कर रहा है। इसके लिए उनकी रचनाएं मामूली सुधार के साथ प्रस्तुत की गई हैं। लेखक की यह रचना पूर्णत मौलिक है। अगर आप भी होशंगाबाद जिले के निवासी हैं तो अपनी रचना हमें मोबाइल नंबर 9630412465 पर भेज सकते हैं।)

sandeep nayak Desk/Reporting
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