अधिक मास: 11 साल बाद बना ऐसा योग, चुटकी में खुश हो जाएंगे भगवान विष्णु .... यह करें उपाय

एक रुपए दान का मिलेगा सौ गुना फल, फिर तीन साल बाद मिलेगा अवसर

By: poonam soni

Published: 16 May 2018, 05:12 PM IST

होशंगाबाद। आज 16 मई से अधिक मास शुरू हो गया है। इसे पुरुषोत्तम मास एवं मलमास भी कहते हैं। भगवान विष्णु का प्रिय होने के कारण उन्होंने इसे अपना नाम दिया था। 11 साल बाद ज्येष्ठ माह में अधिक मास आया है। इस महीने में चुटकियों में भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जा सकता है। एक रुपए दान करने पर सौ गुना फल मिलता है। इसके शुरू होते ही मांगलिक कार्य रूक गए है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार आज से धार्मिक कार्यो के लिए विशेष फलदायी है। इस दिन सभी धार्मिक कार्य करने से फल की प्राप्ति होती है। पुरूषोत्तम मास में विवाह, ग्रहप्रवेश, मकान खरीदी, भूमिपूजन आदि मांगलिक कार्य नहीं होगें। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भागवत कथाएं आदि धार्मिक काम फलदायी माने जाते हैं।

ज्योतिषाचार्य नित्यानंद चौबे ने बताया कि हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) हर तीन साल के बाद आता है। पुरुषोत्तम मास 16 मई से शुरू होकर 13 जून तक रहेगा। अधिक मास 11 साल बाद ज्येष्ठ माह में आया है। इससे पहले 2007 में अधिक मास ज्येष्ठ में आया था। संसार के पालनहार प्रभु विष्णु को पुरुषोत्तम मास बहुत ही प्रिय है। इस दौरान भगवान की पूजा-पाठ करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं। इस माह सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करता।

 

यह करें काम
- 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। रोजाना गुरुमंत्र का जाप करें। कथा सुने एवं पढ़ें। तीर्थ स्थलों पर जाकर स्नान करें। भागवत कथा कराएं या सुनें। व्रत, हवन एवं पूजा करें। इस माह खाने-पीने के भी नियम हैं। इस महीने दानपुण्य का सौ गुना फल मिलता है।

कृष्ण ने दिया था वरदान

मलमास में सभी धार्मिक कार्य वर्जित थे। इस कारण उसे लोग घृणा करने लगे थे। वह दुखी होकर भगवान विष्णु के पास पहुंचा। उसने भगवान से कहा कि वह सबसे अभागा है, उसका कोई स्वामी नहीं है। कोई उसे पसंद नहीं करता, इस कारण मरा चाहता है। तब भगवान विष्णु उसे श्रीकृष्ण के पास गोलोक धाम ले गए। श्रीकृष्ण की शरण में जाने पर उसे विष्णु अवतार हरि ने अपना पुरुषोत्तम नाम देकर कहा कि यह आज से इसमें मेरे ही समान गुण होंगे। यह मेरी ही तरह सभी मासों का स्वामी होगा। कोई इसकी निंदा नहीं करेगा, मैं खुद इसका स्वामी बन गया हूं। ऋषि-मुनि जो फल पाने तप करते हैं वह इस माह में दान-पुण्य, पूजन एवं अनुष्ठान आदि करने से आसानी से प्राप्त हो सकेगा।

यह हैं विवाह मुहूर्त
मई 11, 12 मई
जून 19, 20, 21, 22, 23, 25, 29 जून
जुलाई 6, 10 जुलाई
दिसंबर 10, 13 दिसंबर

क्या है पुरुषोत्तम मास
आचार्य नित्यानंद चौबे के अनुसार जिस महीने में सूर्य संक्राति न हो वह महीना अधिक मास कहलाता है। अधिक मास शुक्ल पक्ष में शुरू होकर कृष्ण पक्ष में समाप्त होता है। आमतौर पर यह स्थिति 32 माह, 16 दिन और 36 सेकंड में हर तीसरे साल में बनती है। ऐसा सूर्य व पृथ्वी की गति में होने वाले परिवर्तन से तिथियों का समय घटने-बढऩे के कारण होता है। ज्योतिष में चंद्र मास 354 दिन और सौर मास 365 दिन का होता है। इस कारण हर साल 11 दिन का अंतर आता है। चंद्र और सौर मास के अंतर को पूरा करने के अधिक मास की व्यवस्था की गई है।

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