यहां रेलवे की पानी की बॉटल से जुटाए जाते हैं बारिश के आंकड़े

यहां रेलवे की पानी की बॉटल से जुटाए जाते हैं बारिश के आंकड़े

Sandeep Nayak | Updated: 14 Jun 2019, 02:25:09 PM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

दशकों पुराने रेलवे के संयंत्र से बारिश के आंकड़े जुटा रहा राजस्व विभाग

अमित बिल्लौरे/सोहागपुर. सोहागपुर राजस्व विभाग में वर्षा के आंकड़े स्थानीय रेलवे स्टेशन पर लगे अंग्रेजों के जमाने के एक बॉटल नुमा संयंत्र से मापे जाते हैं। वहीं जपं में लगा लाखों रुपए लागत का खराब हो चुका संयंत्र प्रशासनिक व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है। जानकारी अनुसार पिछले नौ सालों में यह संयंत्र मात्र दो दिन ही चल सका है बाकी के समय से बंद ही पड़ा है। अब जरूर प्रशासन द्वारा नया संयंत्र स्थापित करने के प्रयास शुरु किए गए हैं। लेकिन यह कब तब हो पाएगा कुछ कहा नहीं जा सकता। मामले में पत्रिका ने स्थानीय राजस्व अधिकारियों से चर्चा के प्रयासा गुरुवार को किए, लेकिन किसी से भी संपर्क नहीं हो सका है।

रेलवे का यंत्र आ रहा काम
तहसील कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार सोहागपुर में रेलवे स्टेशन के समीप पीडब्ल्यूआई कार्यालय के ठीक सामने लगे संयंत्र से वर्षों से राजस्व विभाग द्वारा बारिश के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। उक्त आंकड़ों को सोहागपुर की वर्षा का अधिकृत आंकड़ा माना जाता है। राजस्व विभाग कर्मचारियों के अनुसार प्रतिवर्ष 15 जून से 30 सितंबर के बीच प्रतिदिन एक कर्मचारी सुबह आठ बजे रेलवे स्टेशन जाता है तथा पीडब्ल्यूआई कार्यालय के सामने बने संयंत्र से वर्षा का आंकड़ा लेकर आता है। यह परंपरा सी बन गई है और रेलवे के आंकड़ों को ही सोहागपुर का अंतिम आंकड़ा माना जाता है। जबकि रेलवे के इस संयंत्र की स्थिति भी ठीक नहीं है।

दो दिन चला और हो गया खराब
राजस्व विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्ष 2011 के दौरान संयंत्र स्थापित हो चुका था, लेकिन किसी ने इसे चालू कराने की ओर ध्यान नहीं दिया। फिर 2012 में तत्कालीन एसडीएम नवीत धुर्वे ने उक्त संयंत्र को संचालित करने का प्रयास किया तथा दो दिन तक उन्होंने ही इसे आपरेट भी किया। लेकिन दो दिन तक चलने के बाद संयंत्र खराब हो गया। तभी से संयंत्र खराब पड़ा है तथा इसकी लागत के रूप में व्यय की गई लगभग 14 लाख रुपए की राशि भी बर्बाद हो गई है। फिर मजबूरन दशकों पुरानी रेलवे की कांच की बोतल वाली व्यवस्था से ही ब्लॉक के वर्षा के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।
2017 में दोबारा फिर हुआ प्रयास
मई 2017 के प्रथम सप्ताह में आयुक्त, भू अभिलेख एवं बंदोबस्त मप्र कार्यालय भोपाल से सभी कलेक्टर्स को पत्र भेजा गया था। जिसमें समूचे प्रदेश के प्रत्येक जिले की प्रत्येक तहसील में स्थापित वर्षामापी यंत्रों की जानकारी मांगी गई थी। इसके साथ ही मांग पत्र भी मांगे गए थे कि जहां जरूरत हो वहां संयंत्र स्थापना के लिए तहसीलदार स्तर पर पत्र भेजे जाएं। जिसके बाद सोहागपुर तहसील कार्यालय से संयंत्र स्थापना का मांग पत्र भेजकर मांग की गई थी कि नए तहसील भवन में ही उक्त संयंत्र लगाया जाए। लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है।

बर्र्बाद हुए लाखों रुपए
वर्ष 2009-10 में तत्कालीन तहसील अधिकारियों द्वारा भू-अभिलेख व्यवस्था के तहत जपं सोहागपुर के परिसर में बिना किसी पूर्व तैयारी के लाखों रुपए व्यय कर एक संयंत्र लगाया गया। उक्त संयंत्र की लागत करीब 14 लाख रुपए थी, जिसमें वर्षामापी, हवाओं का रुख बताने वाला तथा तापमापी संयंत्र एक साथ लगाए गए थे जो कि सीधे ही सैटेलाइट के जरिए सोहागपुर के तापमान, वर्षा व हवाओं का सटीक परिणाम दे सकते थे। लेकिन उक्त संयंत्र भी खराब पड़ा है और बरसात होने पर आसपास पानी से घिर जाता है, जहां पानी से होते हुए जाने में कर्मचारी भी घबराते हैं।

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