क्या आप जानते हैं माहवारी के दौरान लगता है कुंवारी कन्याएं और महिलाओं को पाप, इससे ऐसे मिलता है छुटकारा, पढ़े पूरी खबर

पुरूष भी इस व्रत को कर पाप, दोष से मुक्त हो सकते हैं

होशंगाबाद। हिन्दू धर्म में भाद्र पद के शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी का व्रत महिलाएं आज करेगी। आचार्य सोमेश परसाई ने बताया कि पौराणिक मान्याताओं के अनुसार धर्म शास्त्र में ऋषि पंचमी व्रत हिंद महिलाओं में अधिक मान्यता रहती है। यह व्रत सिर्फ महावारी कन्याओं और महिलाओं के लिए बनाया गया है। महावारी में हुई गलती के दोष मुक्त के लिए उपवास किया जाता है। सामान्यत: यह व्रत हर साल अगस्त व सिंतबर माह में आता है। ऋषि पंचमी व्रत के दौरान महिलाएं सुबह से स्नान कर १०८ दातौन कर संध्या के समय व्रत विधि से सप्तऋषि का पूजन करती है। साथ ही इस दिन ब्राम्हण भी जनऊ भी बदला जाता है। महिलाएं महावारी के समय सबसे अधिक अपवित्र मानी जाती है। ऐसे में उन्हे कई नियमों का पालन करना चाहिए, लेकिन जाने अनजाने में भूल हो जाती है। ये भूल सालभर इसी तरह चलती रहती है। महावारी में हुई गलती के कारण कलह का वातावरण निर्मित हो जाता है। अगर आपने भी ऐसी गलतियां की है तो निश्चित हो जाएगी सारी क्लेस और बाधाएं समाप्त हो जाएगी।


क्या है व्रत कथा
हजारों साल पहले एक राज्य में ब्राह्मण पति-पत्नी रहते थे। जो धर्म के पालन में बहुत ही अग्रणी रहते थे। उनकी दो संतानों में एक पुत्र और एक पुत्री थी। बेटी के जवान होते ही माता-पिता ने अच्छा वर खोजकर शादी कर दी। कुछ समय बाद बेटी विधवा हो गई। लोकलज्जा के डर से माता-पिता सहित बेटी गंगा नदी के किनारे कुटिया बनाकर रहने लगी। कुछ समय बाद बेटी के शरीर में कीड़े पड़ गए। बेटी की ये दशा देखकर मां ने पिता से इसका कारण पूछा। पिता ने ध्यान लगाकर पूर्व जन्म को देखा तो उसके होश उड़ गए। ब्राह्मण ने पत्नी को बताया कि तुम्हारी बेटी ने पूर्व जन्म में माहवारी के समय वर्तनों को छू दिया था। जिसके श्राप के कारण ऐसी दशा हुई है। फिर पिता ने बेटी को ऋषि पंचमी व्रत की कहानी बताकर पूजन विधि बताई। इस व्रत के असर के बाद बेटी को अगले जन्म में पूर्ण सौभाग्य प्राप्त हुआ।


ये है पूजा का मुहूर्त
आचार्य सोमेश परसाई ने बताया कि व्रत के दिन यानि १४ सितंबर सुबह उठकर महिलाएं व कन्याएं सूर्याेदया से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा गृह में गाय के गोबर से चौक पूरा करें एवं लकड़ी के पाटा या पिढ़वा में सप्त ऋषि बनाकर उनकी पूजा करें। इसके बाद कलश की स्थापना की जाती हैं।

पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
इस दिन पाटा पर सफेद वस्त्र बिछाकर सप्त ऋषियों की मूर्ति बनाकर दूध, दही, रोली, चंदन सोडसो पचार पूजन करना चाहिए। जिसमें गोघ्रत की आहुतियां देना परम अनिवार्य है। इस व्रत में हल की जुताई वाले खाद्य पदार्थ व्रत में नहीं लेना चाहिए। इसमें पसई धान के चावल खाए जाते हैं। दीप, दूप एवं भोग लगाकर व्रत की कथा सुनी जाती है। माहवारी का समय समाप्त होने के बाद इस व्रत का उद्यापन किया जाता हैं।

ऋषि पंचमी का व्रत कन्याओं और महिलाओं को अनिवार्य किया गया है। इसमें ऋषि पंचमी के दिन सप्त ऋषियों का पूजन पूर्ण विधि विधान से करना चाहिए। इस व्रत में हल की जुताई वाले खाद्य पदार्थ व्रत में नहीं लेना चाहिए।
आचार्य जय नारायण तिवारी

हिन्दू धर्म में ऋषि पंचमी व्रत का काफी महत्व है। जानकारी के आभाव में कई कन्याएं और महिलाएं ये व्रत नहीं रख पाती है। आज की जनरेशन जिन व्रतों को अपने बड़े बुजर्गों से देखती आ रही है उन्ही को सिर्फ रखती है।
रूची अग्रवाल, गृहणी

poonam soni
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