अब भी दौड़ रहे बिना गाइड लाइन के स्कूली वाहन

अब भी दौड़ रहे बिना गाइड लाइन के स्कूली वाहन

sanjeev dubey | Publish: Jan, 13 2018 04:53:06 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

छह दिनों में केवल १५ वाहनों के फिटनेस निरस्त किए, ऑटो रिक्शा में भी बच्चों को ठूंसकर ढोया जा रहा है

हरदा. गत दिनों इंदौर की दिल्ली पब्लिक स्कूल की बस हादसे का शिकार होने के बाद परिवहन विभाग की नींद खुली। पूरे प्रदेश में आनन-फानन में आरटीओ द्वारा स्कूल वाहनों की सघन जांच की जा रही है, इसमें बिना फिटनेस के वाहन चलने की बात उजागर हुईहै। जिले में लगभग ७० स्कूलें बसें तथा करीब २५० ऑटो रजिस्टर्ड हैं। विभाग ने चार दिनों में केवल १५ वाहनों के फिटनेस निरस्त किए हैं।जबकि जिले में आरटीओ की गाइडलाइन नहीं कर रहे कई स्कूली वाहन चोरी-छिपे सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जो बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसके अलावा ऑटो रिक्शा में भी बच्चों को ठंूसकर ले जाया जा रहा है। इस दिशा में विभाग का ध्यान नहीं है।

स्कूली वाहनों में इन नियमों का पालन नहीं
जानकारी के मुताबिक हरदा के अलावा खिरकिया, टिमरनी, सिराली, हंडिया, रहटगांव सहित अन्य गांवों में संचालित हो रही निजी स्कूलों द्वारा बसों, मैजिक वाहन, ऑटो रिक्शा, जीप आदि से बच्चों को लाना-ले जाना किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस, फस्र्ट एड बॉक्स, इमजरेंसी गेट, इमरजेंसी नंबर, स्पीड गवर्नर, अग्निशमन यंत्र , ओरियंटल ग्रिल, बच्चों के बैग रखने के लिए स्थान, बीमा, रजिस्ट्रेशन, ड्राइवर वर्दी, महिला अंटेडर की व्यवस्था के निर्देश दिएथे, किंतु अधिकांश बसों में नियमों का पालन नहीं किया गया है।
सुरक्षा के नहीं कोई इंतजाम
जिला परिवहन विभाग द्वारा स्कूल बसों की जांच की जा रही है, किंतु दूसरी तरफ ऑटो रिक्शा में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। पांच बच्चों की जगह इनमें 10 से 1५ बच्चों को भरकर ले जाया जा रहा है। वहीं सुरक्षा को लेकर कोईव्यवस्था नहीं की गई है। ऑटो के साइडों में जहां दरवाजे नहीं हैं, वहीं पीछे की तरफ बच्चों को पकडऩे के लिए कोई लोहे की राड या अन्य साधन नहीं लगाए गए हैं। बालक-बालिकाएं पैर लटकाकर बैठते हैं।
काम कर रहे हैं सैकड़ों, रजिस्टर्ड केवल ७०
स्कूलों में कईप्राइवेटवाहन अटैच हैं, जिनका कोईरिकार्डनहीं है। वे केवल स्कूल के समय ही सड़क पर दिखते हैं। इसके बाद वह घरों पर खड़े कर दिए जाते हैं। आरटीओ में केवल ७० स्कूली वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन है, जिसमें बसें, मैजिक, जीप, ट्रैक्स वाहन शामिल हैं। ऐसे वाहन ज्यादातर तहसीलों में संचालित हैं। कुछ गांव से शहर तक आते हैं, किंतु आरटीओ और यातायात विभाग की नजर नहीं है। इन वाहनों में स्पीड गवर्नर, फस्र्ट एड बॉक्स, जीपीएस सहित अन्य सुविधाएं नहीं हैं।
ऑटो पर लिखे नंबर गायब, विभाग के पास ब्यौरा नहीं
यातायात विभाग ने पूर्वमें ऑटो की पहचान के लिए नंबर लिखवाए गए थे, ताकि किसी तरह की घटना होने पर पीडि़त व्यक्ति ऑटो का नंबर बता सकें। लेकिन कुछ समय ऑटों पर यह नंबर दिखे। बाद में इन्हें मिटा दिया गया। स्कूलों में अटैच ऑटों का भी विभाग के पास कोईब्यौरा नहीं है। वहीं चालक भी वर्दी नहीं पहनते हैं। प्रदेश में कोई घटना होने के बाद ही विभाग खानापूर्ति के लिए कार्रवाईकरते हैं।जबकि कई निजी बसें, स्कूल बसें और कंडम ऑटो सड़क पर दौड़ रहे हैं, जो दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं।
स्पीड गवर्नर से की गई थी छेड़छाड़
गत ६ जनवरी से जिला परिवहन विभाग द्वारा स्कूल बसों व अन्य वाहनों की जांच की जा रही है। इनमें से अभी तक केवल १५ वाहनों के ही फिटनेस निरस्त किए गए हैं। १३ स्कूली व १० अन्य वाहनों सहित २३ पर चालानी कार्रवाई की गई। जांच में कई वाहन चालकों ने स्पीड गवर्नर को बंद कर रखा था, वहीं कई न पैरामीटर से छेड़छाड़ की थी।
इनका कहना है
गत ६ जनवरी से स्कूली व अन्य वाहनों की सघन जांच की जा रही है। १५ वाहनों के फिटनेस निरस्त किए गए हैं। जिले में ७० स्कूली वाहन रजिस्टर्डहंै। ३० जनवरी तक सभी वाहनों की जांच कर ली जाएगी। ऑटो रिक्शा में भी ओवरलोड बच्चों को भरने की शिकायतें मिली हैं।इनके खिलाफभी कार्रवाईकी जाएगी।
राकेश कुमार आहके, जिला परिवहन अधिकारी, हरदा

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