फर्जी रजिस्ट्री कांड में फंस सकते हैं यह बड़े अधिकारी

फर्जी रजिस्ट्री कांड में फंस सकते हैं यह बड़े अधिकारी

Sandeep Nayak | Updated: 16 Aug 2019, 02:10:56 PM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

दो दिन पहले संजीव श्रीवास्तव को भेजा था जेल

 

इटारसी। फर्जी रजिस्ट्रीकांड इन दिनों शहरभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका कारण इस मामले में और भी बड़े अधिकारियों का इसमें फंसने का संदेह होना है। जिस कारण वह इसमें फंस सकते हैं। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही आरोपी संजीव श्रीवास्तव को जेल भेज दिया गया है। न्यायाधीश स्वाति जायसवाल की अदालत में पेश करने के बाद उसको 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। इधर पुलिस अब फर्जी रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेज खंगालने में लगी हुई है।
यह है मामला
न्यास कॉलोनी के प्रियदर्शनी कॉलोनी में खाली भूखंड को ८१ ए प्लॉट बनाकर शुभांगी रसाल को बेच दिया था। इस मामले में जब पत्रिका ने खबर प्रकाशित की तब शंकर पिता अशोक रसाल ने पुलिस शिकायत की थी। इस मामले में पुलिस ने गांधीनगर निवासी एआरआई संजीव पिता रामशंकर श्रीवास्तव और तेरहवीं लाइन निवासी युसूफ अली राजा शेफी पिता शब्बीर हुसैन के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी का मामला दर्ज किया था। वहीं जांच अधिकारी एसके शुक्ला ने बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया था जहां से उसे १४ दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अभी इस मामले में और भी नाम आ सकते हैं। इस मामले में कानूनी राय ली जाएगी।

ये आ सकते हैं घेरे में
बताया जाता है कि फर्जी रजिस्ट्री के प्रकरण में और भी अधिकारी लपेटे में आ सकते हैं। पुलिस कानूनी राय लेने के बाद अन्य शामिल लोगों को आरोपी बना सकती है। इसमें तत्कालीन सीएमओ अक्षत बुंदेला, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक संजय दीक्षित, हरिओम, सब रजिस्ट्रार आनंद पांडे संदेह के घेरे में है।
पुलिस नहीं बरामद कर पाई फर्जी रसीद कट्टे
फर्जी प्लाट की रजिस्ट्री के बाद पुलिस फर्जी रसीद कट्टे को तलाशने में लगी थी हालांकि यह कट्टे पुलिस को नहीं मिल पाए। पुलिस को इस बात का संदेह है कि प्लाट बिक्री की खरीदी बिक्री फर्जी रसीद कट्टे के माध्यम से हुई है। पुलिस संजीव श्रीवास्तव से यह रसीद कट्टे बरामद नहीं कर पाई है।
अधिकारी इसलिए आए संध्या के डेरे में
तत्कालीन सीएमओ अक्षत बुंदेला और संजय दीक्षित संदेह के घेरे में हैं इसका सबसे बड़ा कारण है समय रहते इस मामले में निर्णय नहीं लेना। बुंदेला को जब पता चल गया था कि फर्जी रजिस्ट्री हुई है तो उन्होंने राशि जमा होने की जांच भी नहीं कराई और ना ही आवेदन देने के बाद संजीव श्रीवास्तव पर कोई कार्यवाही की।
पर्याप्त सबूत मिले हैं फर्जीवाड़े के
फर्जी रजिस्ट्री के मामले में पुलिस ने अभी तक जो जांच की है उसमें पर्याप्त दस्तावेज मिले हैं जिससे यह साबित हो जाएगा कि फर्जीवाड़ा हुआ है। इसमें रजिस्ट्री, रजिस्ट्री से पहले जो टैंपरिंग की गई है उससे संंबंधित दस्तावेज के साथ ही नगर पालिका में राशि जमा नहीं होने संबंधी जो प्रमाण मिले हैं इससे तय हो चुका है फर्जीवाड़ा हुआ है।
ऐसे बनाया था नया प्लाट : नगर पालिका परिषद इटारसी नगर विकास प्रकोष्ठ द्वारा प्रियदर्शनी नगर में 80 नग एलआईजी ए टाइप भूखंड प्रत्येक का रकबा 72.00 वर्गमीटर अर्थात 800 वर्ग फिट के विकसित किए थे। इसमें सार्वजनिक उपयोग की छोड़ी गई जगह को एलआईजी 81 ए नंबर देकर यह भूखंड बेचा गया। यहां सभी भूखंड 72 मीटर मतलब 800 वर्गफीट के हैं जबकि एलआईजी 81 ए का रकबा 1000 वर्गफीट बना दिया गया था।

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