9 साल बाद पूर्व सहायक वन संरक्षक को 10 साल की सजा, जानिए क्या है मामला

22 लाख रुपए के गबन के मामले में कोर्ट ने पूर्व सहायक वन संरक्षक को 10 साल की कैद और 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया..

By: Shailendra Sharma

Published: 17 Jun 2021, 09:09 PM IST

होशंगाबाद/सोहागपुर. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के विस्थापित ग्राम साकोट पुनर्वास समिति के बैंक खाते से 22 लाख रुपए निकालकर निजी उपयोग करने के मामले में कोर्ट ने पूर्व सहायक वन संरक्षक गोविंदराम सिंह चौहान को 10 वर्ष की सजा सुनाई है। सोहागपुर एडीजे अतुल खंडेलवाल ने गुरुवार को यह आदेश दिया। शासकीय अधिवक्ता शंकरलाल मालवीय ने बताया की मामला वर्ष 2012-13 का है। जब धांई, बोरी एवं साकोट ग्रामों का विस्थापन सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से किया गया था।

 

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संरक्षक ने ही निकाल लिए थे ग्रामीणों के 22 लाख रुपए
शासकीय अधिवक्ता शंकरलाल मालवीय ने बताय कि तब विस्थापन अधिकारी के रूप में पूर्व सहायक वन संरक्षक गोविंदराम सिंह चौहान पुत्र जगराम सिंह चौहान ने विस्थापित ग्राम नया साकोट के ग्राम पुनर्वास समिति के बैंक खाते से 22 लाख रुपए की राशि का आहरण करते हुए उक्त राशि निजी उपयोग में व्यय कर दी थी। मामले में एडीजे अतुल खंडेलवाल के न्यायालय ने गुरुवार को गोविंदराम सिंह चौहान को 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। मालवीय ने बताया कि चौहान को सोहागपुर न्यायालय से पिपरिया जेल पहुंचाया गया है। 65 वर्षीय गोविंद राम सिंह चौहान को मामले के खुलासे के बाद सस्पेंड कर भोपाल अटैच कर दिया गया था।

 

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तीन चेक से निकाली थी राशि
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि चौहान ने समिति के सेमरी हरचंद स्थित भारतीय स्टेट बैंक के खाते से एक चेक से आठ लाख 90 हजार रुपए दूसरे चेक से आठ लाख 10 हजार रुपए एवं तीसरे चेक से पांच लाख रुपए आहरित किए थे। मालवीय ने बताया कि नियमानुसार विस्थापित ग्राम की ग्राम पुनर्वास समिति के बैंक खाते से राशि निकालने के लिए समिति अध्यक्ष एवं विस्थापन अधिकारी के हस्ताक्षर होने चाहिए थे। लेकिन गोविंदराम सिंह चौहान ने अध्यक्ष के हस्ताक्षर ना कराते हुए विस्थापन अधिकारी के रूप में स्वयं हस्ताक्षर किए तथा तीन चेक के माध्यम से उक्त राशि निकालकर निजी व्यय में उपयोग की थी। अधिवक्ता मालवीय के अनुसार तत्कालीन मढ़ई रेंज ऑफिसर संदेश माहेश्वरी ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उक्त मामले में प्रकरण दर्ज कराया था। प्रकरण में 16 पक्षियों के बयान कराए गए थे।

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