एक साल में न गोबर खरीदा न ही कंडे बिके

अरूचि के चलते फ्लॉप हुई नगर परिषद की योजना

By: sandeep nayak

Published: 10 Mar 2019, 01:24 PM IST

सोहागपुर. पर्यावरण संरक्षण, वृक्षों की बचत, गौरक्षा व बेरोजगार को रोजगार उपलब्ध कराने के बहुउद्देश्यीय लक्ष्य की पूर्ति की मंशा के साथ नगर परिषद के कांजी हाउस में 2017 के अंत में गोबर खरीदी व कंडा विक्रय केंद्र शुरू किया गया था। लेकिन अब तक एक बार भी न तो गोबर खरीदा जा सका है और न ही कंडा खरीदा या बेचा जा सका है। हालात यह है कि योजना ठंडे बस्ते में पहुंच गई है और गौ संरक्षण की दिशा में कार्य करने की शासकीय मंशा कारगर साबित नहीं हो सकी है।
नप से प्राप्त जानकारी अनुसार केंद्र की स्थापना दिसंबर 2017 में की गई थी, जहां तय किया गया था कि कांजी हाउस में मवेशियों को भी रखा जाएगा तथा पशुपालक यहां गोबर बेच सकेंगे, जिनसे कंडे बनाए जाएंगे। तथा कंडों को बेचकर नगर परिषद आय प्राप्त करेगी। लेकिन प्रशासन की लापरवाही, बिना पूर्व तैयारी की गई केंद्र की स्थापना व किसी एनजीओ अथवा निजी संस्था का सहयोग न मिलने के चलते बहुआयामी लाभ की योजना कोई काम नहीं आ पाई है। नप सूत्रों के अनुसार यदि उक्त केंद्र शुरू हो जाता तो निश्चित ही सोहागपुर निकाय गौ संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण व अनूठे तरीके से राजस्व प्राप्ति के मामले में प्रदेश का एकमात्र निकाय साबित होता। तथा सबसे बड़ा कार्य गौ संरक्षण का होता, क्योंकि गोबर अधिक उपयोगी साबित होने की स्थिति में गौ पालक भी मवेशियों को सड़कों पर खुला नहीं छोड़ते। तथा मवेशी राहों पर भटकते नहीं। वहीं तैयारी यह भी थी कि शवदाह गृहों व मुक्तिधामों पर भी लकड़ी के स्थान पर कंडों का उपयोग होता, जो कि अधिक कारगर व कम व्यय वाला कार्य साबित होता। जिससे सर्वाधिक लाभ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में होता।

यह थी तैयारी
सीएमओ जीएस राजपूत ने बताया कि योजना के अनुसार दीवार लेखन कराया गया तथा पर्याप्त प्रचार व प्रसार के प्रयास भी किए गए। करीब चार दिनों तक कर्मचारी भी बिठाया गया था, जो कि गोबर खरीदी करता। लेकिन न तो कोई आम नागरिक गोबर बेचने आया न ही कोई गौ पालक। यदि कोई भी व्यक्ति लगातार गोबर बेचता तो कर्मचारी को लगातार बैठाया जाता तथा केंद्र संचालन प्रारंभ हो जाता। न ही किसी समिति या संगठन या एनजीओ से ही कोई अनुबंध किया जा सका। नप ने गौ सेवा व गौ पालन के क्षेत्र में प्रयास करने वाले कुछ संगठनों तथा व्यक्तियों से चर्चा भी की थी, लेकिन वे भी सामने नहीं आए। क्योंकि उनके लाभ व हानि के गुणा-भाग के अनुसार उन्हें केंद्र पर सेवा देने से कोई लाभ नहीं मिल पा रहा था।

नगर परिषद की मंशानुरूप योजना पूरी तैयार हो चुकी थी। लेकिन जनता व गौ सेवा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए किसी संगठन या संस्था से सहयोग नहीं मिल पाया। प्रयास किए गए थे कि कोई संगठन या संस्था केंद्र संचालन के लिए अनुबंध करे, तो गौ संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गोबर खरीदी केंद्र मील का पत्थर साबित होता। लेकिन सहयोग नहीं मिल सका इसलिए केंद्र बंद है।
- जीएस राजपूत, सीएमओ नप सोहागपुर।

sandeep nayak Desk/Reporting
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