यहां रोपे थे 2.67 लाख पौधे, अब हैं यह हालात

दो जुलाई 2017 में किया गया था वृहद स्तर पर नर्मदा किनारे सहित मैदानी क्षेत्रों में महा-पौधारोपण

By: sandeep nayak

Published: 01 Jul 2019, 01:12 PM IST

सोहागपुर। मप्र सरकार द्वारा दो जुलाई 2017 को पौधरोपण के वल्र्ड रिकार्ड बनाने के चक्कर में थी इसके लिए जोर-शोर से नर्मदा किनारे सहित आम क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया था। लेकिन रोपे गए पौधों का 50 फीसदी भी ब्लॉक क्षेत्र में सुरक्षित नहीं बच पाया है। यदि उंगली पर गिनी जा सकने वाली साइट्स को छोड़ दिया जाए तो कई स्थानों पर तो पौधरोपण के क्षेत्र तक गुम होने की स्थिति मेें बताए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि दो जुलाई 2017 के पौधरोपण के लक्ष्य की पूर्ति के लिए करीब दो महीनों तक प्रशासनिक अमला कोई और कार्य कर ही नहीं सका था। तथा सोहागपुर में निर्धारित लक्ष्य के दो लाख 67 हजार पौधे रोपने के लिए अत्यधिक तैयारी की गई थी। एक ही दिन में इतने पौधे रोपे तो नहीं जा सके, लेकिन इसके बाद एक सप्ताह तक रोपित पौधों की संख्या को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए भरपूर प्रयास किए गए। सभी शासकीय कर्मचारी अलग-अलग दायित्य के बोझ तले छोड़े गए थे। शिक्षकों को मानीटरिंग का कार्य दिया गया था, कुछ स्टेवर्ड बनाए गए थे जो कि पौधरक्षकों के साथ मिलकर खेतों, खलिहानों, तालाबों के किनारे, सार्वजनिक स्थानों, नर्मदा किनारे आदि स्थानों पर रोपे गए पौधों की संख्या के आंकड़े जुटाने में लगे थे। कंट्रोल रूम तक बनाया गया था तथा बीआरसीसी कार्यालय में बैठकर वल्र्ड रिकार्ड के लिए जीपीएस लोकेशन सहित आंकड़े एकत्रित कर रहे थे।

महंगे पड़े थे पौधे
जपं से प्राप्त जानकारी अनुसार हरदा, सेमरी, जमुनिया, निभौरा नर्सरी, अलीराजपुर, सागर आदि क्षेत्रों से शीशम, नीम, करंजी आदि प्रजातियों के पौधे लिए गए थे। जिनके बदले प्राप्त आंकड़ों के अनुसार लाखों रुपए व्यय करने पड़े थे। वो भी न सिर्फ पौधे व्यय करने के लिए बल्कि इनके परिवहन के लिए भी। जपं सूत्र बताते हैं कि हरदा क्षेत्र में ही पौधों के लिए तीन लाख 58 हजार 500 रुपए का भुगतान किया गया था। वहीं शहरी क्षेत्र में दो हजार 750 पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया था, तथा शहरी क्षेत्र में भी लक्ष्य के 50 फीसदी पौधे भी आज नहीं दिखाई देते हैं।

sandeep nayak Desk/Reporting
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