31 जनवरी को लगेगा चांद को ग्रहण, किन पर होगा असर, क्या करें उपाय

इस साल होंगे दो चंद्रग्रहण और तीन सूर्यग्रहण, भारत में दिखाई नहीं देगा कोई भी सूर्यग्रहण

By: govind chouhan

Published: 04 Jan 2018, 03:53 PM IST

होशंगाबाद. नया साल 2018 शुरू हो गया है। नई उम्मीदें, उत्साह और सुखद भविष्य की कामनाओं के साथ जिस तरह लोगों ने नए साल का स्वागत किया है। उसी तरह साल भर होने वाली खगोलीय घटनाओं व घटनाक्रमों को लेकर भी उत्सुकता बनी रहती है। खगोलीय घटनाओं के कारण ही सूर्यग्रहण व चंद्रग्रहण पड़ते हैं। जिन्हें लेकर उत्सुकता और भ्रम दोनों ही होते हैं। क्योंकि किसी राशि पर यह शुभ फल देने वाले तो किसी के लिए अशुभ फलदायी होते हैं। वर्ष 2018 में सालभर में दो चंद्रग्रहण और तीन सूर्यग्रहण होंगे। साल का पहला महीना अर्थात जनवरी अपने साथ चंद्रग्रहण लेकर आया है जो खग्रास होगा और पूरे भारत में दिखाई देगा।
पहला खग्रास चंद्रग्रहण 31 जनवरी को...
साल का सबसे पहला ग्रहण 31जनवरी को होगा । माघ शुक्ल पूर्णिमा के दिन होने वाला यह ग्रहण खग्रास चंद्रग्रहण होगा। यह पूरे भारत में दिखाई देगा। ग्रहण शाम को पांच बजकर 18 मिनट पर प्रारम्भ होगा और रात आठ बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण की कुल अवधि तीन घंटे 24 मिनट होगी।
दूसरा चंद्रग्रहण जुलाई में
साल का दूसरा दूसरा चंद्रग्रहण 27-28 जुलाई आषाढ़ पूर्णिमा को पड़ेगा। यह चंद्रग्रहण रात में 11 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगा और 3 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण की कुल अवधि तीन घंटा 55 मिनट होगी। यह खग्रास चंद्रग्रहण उत्तराषाढ़ाए श्रवण नक्षत्र तथा मकर राशि में होगा। जिनका जन्म इन नक्षत्र और मकर राशि व मकर लग्न में हुआ है उनके लिए कष्टप्रद रहेगा। मेष, सिंह, वृश्चिक, मीन राशि व लग्न वालों के लिए श्रेष्ठ। वृषभ, कर्क, कन्या व धनु राशि वालों के लिए मध्यम फलप्रद। मिथुन, तुला, मकर व कुंभ के लिए कष्टप्रद रहेगा।

भारत में नहीं दिखेंगे सूर्यग्रहण
दो चंद्रग्रहण के अलावा साल भर में तीन सूर्यग्रहण भी होंगे लेकिन तीनो सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखाई देंगे।
इन तिथियों में होंगे सूर्यग्रहण
15 फरवरी 2018, तिथि अमावस्या
13 जुलाई 2018 , तिथि आषाढ़ कृष्ण अमावस्या
11 अगस्त 2018, पौष कृष्ण अमावस्या

ग्रहण क्या है

खगोल शास्त्र के अनुसार जब एक खगोलीय पिंड पर दूसरे खगोलीय पिंड की छाया पड़ती है, तब ग्रहण होता है। हर साल सूर्य व चंद्र ग्रहण दिखाई देते हैं, जो पूर्ण व आंशिक प्रकार के होते हैं।
पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन से उत्पन्न अमृत को दानवों ने देवताओं से छीन लिया था। इस दौरान भगवान विष्णु ने मोहिनी नामक सुंदर कन्या का रूप धारण करके दानवों से अमृत ले लिया और उसे देवताओं में बांटने लगे, लेकिन भगवान विष्णु की इस चाल को राहु नामक असुर समझ गया और वह देव रूप धारण कर देवताओं के बीच बैठ गया। जैसे ही राहु ने अमृतपान किया, उसी समय सूर्य और चंद्रमा ने उसकी चाल का खुलासा कर दिया। उसके बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन च्रक से राहु की गर्दन से धड़ अलग कर दिया। अमृत के प्रभाव से उसकी मृत्यु नहीं हुई लेकिन उसका सिर व धड़ राहु और केतु की छाया ग्रह के रूप में सौर मंडल में स्थापित हो गए। माना जाता है कि राहु और केतु ही सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण के रूप में शापित करते हैं।

सूर्य ग्रहण क्या है- जब चंद्रमा सूर्य एवं पृथ्वी के मध्य में आता है, तब यह पृथ्वी पर आने वाले सूर्य के प्रकाश को रोकता है और सूर्य में अपनी छाया बनाता है। इस खगोलीय घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। जब चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक ले तब पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है। और जब चंद्रमा सूर्य को आंशिक रूप से ढक लेता है तब आंशिक सूर्य ग्रहण होता है।

चंद्र ग्रहण क्या है- जब पृथ्वी सूर्य एवं चंद्रमा के बीच आ जाती है तब यह चंद्रमा पर पडऩे वाली सूर्य की किरणों को रोकती है और उसमें अपनी छाया बनाती है। इस घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है। जब पृथ्वी चंद्रमा को पूरी तरह से ढक लेती है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है और जब पृथ्वी चंद्रमा को आंशिक रूप से ढकती है, तो उस स्थिति में आंशिक चंद्र ग्रहण होता है।

ग्रहण के समय क्या करें क्या न करें

यह न करें- ग्रहण कालक े दौरान कोई नया कार्य न करें, सूतक के दौरान भोजन बनाना और खाना वर्जित होता है, मल-मूत्र और शौच नहीं करें, देवी-देवताओं की मूर्ति और तुलसी के पौधे का स्पर्श नहीं करना चाहिए, दांतों की सफ़ाई, बालों में कंघी आदि नहीं करें।

यह जरूर करें- ध्यान , भजन, ईश्वर की आराधना करें, सूर्य व चंद्र से संबंधित मंत्रों का उच्चारण करें, ग्रहण समाप्ति के बाद घर की शुद्धिकरण के लिए नर्मदाजल का छिड़काव करें, ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान के बाद भगवान की मूर्तियों को स्नान कराएं और पूजा करें. सूतक काल समाप्त होने के बाद ताज़ा भोजन करें।

गभवती महिलाएं रखें विशेष ध्यान
ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने और ग्रहण देखने से बचना चाहिए। ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, काटने और छीलने जैसे कार्यों से बचना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के समय चाकू और सुई का उपयोग करने से गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों को क्षति पहुंच सकती है।

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