दो तस्वीरें : दो बेटे नहीं पहुंच सके मां को मुखाग्नि देने, इधर आठ बेटियों ने किया पिता का अंतिम संस्कार

ghanshyam rathor

Publish: Oct, 13 2017 10:35:17 (IST)

Hoshangabad, Madhya Pradesh, India
दो तस्वीरें : दो बेटे नहीं पहुंच सके मां को मुखाग्नि देने, इधर आठ बेटियों ने किया पिता का अंतिम संस्कार

वर्धा में सोने-चांदी की दुकान होने के कारण बेटे नहीं पहुंचे अंत्येष्टि में, समाज ने किया संस्कार

बैतूल। मां ने बच्चों को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उन्ही बच्चों को उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने का समय ही नहीं मिला। गुरुवार को मां ने दुनिया छोड़ी तो अंतिम समय में उसे अग्नि देने दो बेटों में से एक भी नहीं पहुंचा। इसे देखकर लोगों को तीन दिन पहले का नजारा याद आ गया जब बैतूल जिले में ही आठ बेटियों ने मिलकर अपने पिता को मुखाग्नि देकर ना सिफ बेटों का फर्ज निभाया था, बल्कि मां की परवरिश करने की भी जिम्मेदारी ली थी।



दो बेटे, एक भी नहीं पहुंचा
भैंसदेही के महावीर वार्ड निवासी 80 वर्षीय शांताबाई गोविन्दराव बांगरे के तीन बेटे थे, एक की मौत हो गई है। दो जीवित हैं, जिनका महाराष्ट्र के वर्धा में सोने-चांदी का कारोबार है बेटों ने सात साल पहले मां का साथ को उसके हाल छोड़ दिया था। एक माह पहले स्थिति गंभीर होने पर वृद्धा को कलेक्टर शंशाक मिश्र द्वारा ग्राम उड़दन में आश्रम में पहुंचाया था। जहां १२ अक्टूबर को अंतिम सांस ली। इसकी सूचना दोनों बेटों के दी गई, लेकिन दोनों ने आने से इनकार कर दिया। अंतत: समाजसेवियों और आश्रम संचालक ने ही वृद्धा को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया गया।
आश्रम के संचालक मनोज विष्ठ और समाज सेवी संजय बांगरे ने गुरुवार को ग्राम उड़दन के वृद्धा को मुखाग्नि दी।

 

इधर, आठ बेटियों ने किया पिता का अंतिम संस्कार
8 अक्टूबर को बैतूल जिले के मुलताई में आठ बेटियां अपने पिता को मुखाग्रि देने पहुंची। बेटियों द्वारा मुखाग्रि देते हुए अंतिम संस्कार के सभी का निर्वहन किया गया। पुत्र ही पिता को मुखाग्रि देगा यह भ्रांति धीरे-धीरे समाप्त होते जा रही है। पुत्र नहीं होने पर बेटियां भी यह धर्म निभा सकती हैं।
नगर के विवेकानंद वार्ड निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक गुलाबचंद सोनी का देहांत छिंदवाड़ा में रविवार रात हो गया था। सेवानिवृत्त शिक्षक के देहांत के बाद समाज के लोग कहने लगे कि मुखाग्रि कौन देगा जिस पर शिक्षक की आठों बेटियों ने आगे बढ़कर यह धर्म निभाने का कहा। शिक्षक की सबसे बड़ी बेटी उषा सोनी, संध्या सोनी,सविता सोनी, शालिनी सोनी, श्रद्धा सोनी, सरिता सोनी,गायत्री सोनी तथा श्वेता सोनी ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें पुत्र जैसी ही परवरिश की है। हमें हमारे पिता ने पढ़ाया-लिखाया तथा अच्छे घरों में विवाह किया जिस से आज हम सभी सक्षम है इसलिए वे पुत्र का भी धर्म निभा सकती हैं।
शिक्षक की सबसे बड़ी बेटी उषा सोनी ने बताया कि उनका कोई भाई नहीं है इसलिए वे पुत्र की ही तरह अपनी मां की भी देखभाल करेगीं ताकि समाज में यह संदेश जा सके कि आज की बेटियां भी पुत्र के सारे फर्ज निभा सकती हैं।

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