कोल नगरी में स्वाइन फ्लू से एक और मौत

सारणी के युवक की सोमवार को बैतूल में उपचार के दौरान स्वाइन फ्लू से मौत हो गई

By: harinath dwivedi

Published: 11 Sep 2017, 01:14 PM IST

सारनी। कोल नगरी सारणी में स्वाइन फ्लू से एक और मौत हो गई। इस कारण नगर में दहशत का माहौल है। सारणी के शोभापुर कॉलोनी निवासी युवक को बीमार होने पर बैतूल के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार सुबह उसकी स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। इधर, स्वाइन फ्लू समेत मौसमी बीमारी के खिलाफ इंटक यूनियन नेताओं ने सोमवार को बैठक कर आंदोलन की चेतावनी दी है। दो कोल कर्मी की अब तक स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है। एक नागपुर अस्पताल में भर्ती है। एक गैर कर्मी की भी शोभापुर में मौत हो गयी।
इसके पहले 5 सितंबर को सुरेश उदय बोबड़े की मौत नागपुर के कुणाल अस्पताल में उपचार के दौरान हुई थी। इसके बाद 8 सितंबर को नागपुर के विनस अस्पताल से मुकेश यादव की संदिग्ध स्वाइन फ्लू से मौत हो गई थी। शुक्रवार सुबह जब प्रथम पाली में साथी लोग खदान पहुंचे थे तो उनकी आंखें नम थी। खदान प्रांगण में कर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर मृतकों को श्रद्धाजंलि दी। एटक यूनियन के क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी राकेश वाईकर ने बताया कि मुकेश यादव भूमि अधिग्रहण के केस में रावनवाड़ा से दो साल पहले पाथाखेड़ा में पदस्थ हुआ था। संक्रामक बीमारी फैले नहीं। इसलिए मृतक को सावधानी से अपने गांव में दफनाया गया। छतरपुर-1 खदान में जनरल मजदूर के पद पर कार्यरत मुकेश यादव 15 दिनों से बीमार था। बगडोना में रहकर नौकरी करता था। 29 अगस्त से वह नौकरी पर नहीं पहुंचा। इस पर चर्चा थी कि स्वास्थ्य बिगडऩे पर मुकेश गांव लौट गया। था, वहां से उसे नगापुर के विनस अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिस दिन से वह अस्पताल में भर्ती था। उसी दिन से उसे आईसीयू में रखा गया था।

जीएम ने बैठक में दिए थे उच्च स्तरीय निर्देश
स्वाइन फ्लू से पहली मौत के बाद वेकोलि महाप्रबंधक यूए कावले द्वारा क्षेत्रीय अस्पताल में चिकित्सकों समेत अन्य अधिकारियों की बैठक लेकर मौसमी बीमारियों की रोकथाम के सख्त निर्देश दिए हैं। निर्देशों पर अभी अमल हुआ भी नहीं था कि एक और मौत से प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गई। वेकोलि के पास क्षेत्रफल व आबादी की दृष्टि से अमला नहीं है। कालोनियों में महीनों से सफाई नहीं होती। नपा अमला द्वारा कालोनियों की सफाई की जाती है।
नगर में सूअरों की भरमार
सारनी, पाथाखेड़ा और शोभापुर क्षेत्र में कई स्थानों पर सुअरों की भरमार है। इसकी जानकारी नगरपालिका प्रशासन को भलीभांति है। बावजूद इसके खुले में भ्रमण पर रोक नहीं लगाई है। कोल नगरी में तो रिहायशी क्षेत्रों में सुअर विचरन करती है। जानकार बता रहे हैं कि सूअरों से यह बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।

harinath dwivedi Editorial Incharge
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