तवा रेलवे ब्रिज के 15१ वर्ष पूरे, १९ महीने में बनाया गया था रेल ब्रिज

ईस्ट इंडियन रेलवे और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे के सिविल इंजीनियर रॉबर्ट मेटलैंड ब्रेरेटन ने बनाया था ब्रिज

By: Manoj Kundoo

Updated: 10 Sep 2021, 08:39 PM IST

होशंगाबाद। भारत में ईस्ट इंडिया रेलवे (इआइआर) और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (जीआइपीआर) द्वारा रेलगाड़ी चलाने और रेल लाइन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इन दोनों कंपनियों ने मिलकर 15१ वर्ष पहले 1870 में मुंबई और कोलकाता के बीच पहली बार रेल संपर्क के लिए जबलपुर को जोड़ा गया था। गौरतलब है कि जबलपुर से इटारसी रेलखंड पर तवा नदी पड़ती है। इस रेल लाइन पर सबसे पुराना तवा ब्रिज और बागरातवा सुरंग का निर्माण ईस्ट इंडियन रेलवे और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे के सिविल इंजीनियर रॉबर्ट मेटलैंड ब्रेरेटन ने किया था। इसे बनाने में 19 महीने लगे थे। ब्रिज 8 मार्च 1870 को बनकर पूर्ण हुआ था। इस ऐतिहासिक पुराने पुल को 15१ वर्ष पूर्ण हो गए हैं। तवा ब्रिज और बागरातवा सुरंग आज भी सोनतलाई और बागरातवा स्टेशनों के बीच ट्रैक के आठ किलोमीटर के हिस्से पर है। इस खंड के दोहरीकरण का कार्य रेलवे द्वारा फरवरी 2020 में कपंलीट किया गया। वर्तमान समय में पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा तवा नदी पर एक अतिरिक्त नया तवा ब्रिज का निर्माण किया गया है।

रेलवे ब्रिज/पुल की खास बातें...
यह पमरे के महत्वपूर्ण ब्रिजों में से एक अहम धरोहर के रूप में है। जिसे सन 1927 में रीगर्डर भी किया गया। यह पुल तवा नदी पर तवा बांध से 7 किमी दूरी पर स्थित है। पुल में 132 फिट के 2 स्पैन और 202 फिट के 4 स्पैन के नीचे वेब गर्डर है। इसके साथ 5 नग पियर और 2 नग एबटमेंट जो तत्कालीन समय की एशलर महीन चिनाई से बनी है। पुल की ऊंचाई 22 मीटर है।

तवा रेलवे ब्रिज के 15१ वर्ष पूरे, १९ महीने में बनाया गया था रेल ब्रिज
ईस्ट इंडियन रेलवे और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे के सिविल इंजीनियर रॉबर्ट मेटलैंड ब्रेरेटन ने बनाया था ब्रिज
होशंगाबाद। भारत में ईस्ट इंडिया रेलवे (इआइआर) और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (जीआइपीआर) द्वारा रेलगाड़ी चलाने और रेल लाइन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इन दोनों कंपनियों ने मिलकर 15१ वर्ष पहले 1870 में मुंबई और कोलकाता के बीच पहली बार रेल संपर्क के लिए जबलपुर को जोड़ा गया था। गौरतलब है कि जबलपुर से इटारसी रेलखंड पर तवा नदी पड़ती है। इस रेल लाइन पर सबसे पुराना तवा ब्रिज और बागरातवा सुरंग का निर्माण ईस्ट इंडियन रेलवे और ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे के सिविल इंजीनियर रॉबर्ट मेटलैंड ब्रेरेटन ने किया था। इसे बनाने में 19 महीने लगे थे। ब्रिज 8 मार्च 1870 को बनकर पूर्ण हुआ था। इस ऐतिहासिक पुराने पुल को 15१ वर्ष पूर्ण हो गए हैं। तवा ब्रिज और बागरातवा सुरंग आज भी सोनतलाई और बागरातवा स्टेशनों के बीच ट्रैक के आठ किलोमीटर के हिस्से पर है। इस खंड के दोहरीकरण का कार्य रेलवे द्वारा फरवरी 2020 में कपंलीट किया गया। वर्तमान समय में पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा तवा नदी पर एक अतिरिक्त नया तवा ब्रिज का निर्माण किया गया है।

रेलवे ब्रिज/पुल की खास बातें...
यह पमरे के महत्वपूर्ण ब्रिजों में से एक अहम धरोहर के रूप में है। जिसे सन 1927 में रीगर्डर भी किया गया। यह पुल तवा नदी पर तवा बांध से 7 किमी दूरी पर स्थित है। पुल में 132 फिट के 2 स्पैन और 202 फिट के 4 स्पैन के नीचे वेब गर्डर है। इसके साथ 5 नग पियर और 2 नग एबटमेंट जो तत्कालीन समय की एशलर महीन चिनाई से बनी है। पुल की ऊंचाई 22 मीटर है।

Manoj Kundoo Reporting
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