जिला अस्पताल में टीबी और स्वाइन फ्लू के मरीज रहेंगे साथ, मरीजों में क्रास इंफेक्शन का खतरा

स्वाइन फ्लू वार्ड को दो भागों में बांट कर बना रहे क्षय रोग वार्ड

By: pradeep sahu

Published: 30 Dec 2018, 11:50 AM IST

होशंगाबाद. जिला अस्पताल में लापरवाही का एक और उदाहरण सामने आया है। अस्पताल के एक ही वार्ड में स्वाइन फ्लू और गंभीर क्षय रोगियों (एमडीआर टीबी के मरीजों) को भर्ती करेंगे। इसके लिए पहले से बने स्वाइन फ्लू वार्ड को दो हिस्सों में बांट रहे हैं। एक ही कमरे मे होने से चिकित्सा विशेषज्ञ खुद स्वीकार कर रहे हैं कि इससे क्रास इंफेक्शन का खतरा बढ़ेगा। दोनों प्रकार के मरीजों को एक-दूसरे का रोग हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि क्षय रोगियों के लिए जिला अस्पताल में अलग वार्ड बनाने के लिए पिछले छह महीने से जगह की तलाश चल रही थी जो स्वाइन फ्लू वार्ड पर जाकर खत्म हुई। जब कहीं जगह नहीं मिली तो अस्पताल प्रबंधन ने स्वाइन फ्लू वार्ड के आधे हिस्से में पाटीशन कर टीबी वार्ड बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल टीबी वार्ड के लिए स्वाइन फ्लू वार्ड का रंगरोगन चल रहा है। यहां चार बेड रखे जाएंगे। जिसके आधे हिस्से में एमडीआर टीबी और दूसरे हिस्से में स्वाइन फ्लू मरीज भर्ती होंगे। वर्तमान में एमडीआर टीबी के मरीजों को भोपाल रेफर करते हैं।
एक सप्ताह भर्ती रहेंगे मरीज -जिला क्षय रोग अधिकारी डा. संजय पुरोहित ने बताया कि कमेटी के चेयरमेन सीएस सुधीर डेहरिया हैं। वार्ड में एमडीआर टीबी के मरीजों को एक सप्ताह तक भर्ती रखकर सभी तरह की प्रारंभिक जांचें की जाएंगी। इसके बाद उसे छुट्टी दे दी जाएगी। इसके बाद घर पर आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से दवाइयां दी जाएगी।

घातक है लापरवाही - एमडीआर टीबी के मरीजों पर सामान्य टीबी की दवाइयों का कोई भी असर नहीं होता। इसीलिए इनकी जांच और इलाज विधि अलग होती है। एमडीआर टीबी दौरान मरीज का इलाज लगभग 24 से 27 महीने तक चलता है। मरीज को एक सप्ताह तक भर्ती किया जाता है, उसके बाद लीवर, किडनी, मेंटल हेल्थ, कान इत्यादि की जांच नियमित होती है। मरीज को यदि घर भेजा जाता है तो उसकी हर महीने जांच की जाती है।

इनका कहना है..
1. छह महीने से प्रयास कर रहे थे। अस्पताल में जगह नहीं होने की वजह से अब स्वाइन फ्लू वाले वार्ड में पाटीशन करके वार्ड बना रहे हैं। इससे क्रांस इंफेक्शन का खतरा है। हमने सीएस को इस समस्या से अवगत कराया है।
डा. संजय पुरोहित, जिला क्षय रोग विशेषज्ञ

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