मेरे नगर की पहचान, सुराही, परमल और पान

मेरे नगर की पहचान, सुराही, परमल और पान

govind chouhan | Publish: Sep, 16 2018 06:09:21 PM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 06:09:22 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

सोहागपुर साहित्य परिषद ने किया काव्य गोष्ठी व पुस्तक विमोचन कार्यक्रम

सोहागपुर. सोहागपुर साहित्य परिषद के तत्वावधान में पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति महाविद्यालय सभागार में शनिवार दोपहर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें सोहागपुर सहित बाहर से आए कवियों ने काव्य पाठ किया। इसके अलावा लेखक सुरेश पटवा की दो पुस्तकों का भी विमोचन आयोजन में किया गया है।
सोहागपुर साहित्य परिषद अध्यक्ष पं. राजेंद्र सहारिया व सचिव श्वेतल दुबे ने बताया कि काव्य गोष्ठी के पूर्व दोपहर करीब एक बजे से पुस्तक विमोचन समारोह हुआ, जिसमें सुरेश पटवा की दो पुस्तकों 'गुलामी की कहानीÓ व 'पचमढ़ी की खोजÓ का विमोचन परिषद संरक्षक डॉॅॅ. अरविंद सिंह चौहान सहित भोपाल से आए साहित्यकारों कृष्णजी श्रीवास्तव व हमीर सिंह बघेल, वरिष्ठ समाजसेवी रामनारायण खंडेलवाल, पं. मनमोहन मुदगल, अवधेश शर्मा पिपरिया, नारायण श्रीवास्तव करेली, गोविंद सिंह बादल, प्रेमनारायण श्रीवास्तव के द्वारा किया गया है। कार्यक्रम में सोहागुपर के वरिष्ठ कवियों गोविंद सिंह बादल, प्रेमनारायण श्रीवास्तव व सुरेश पटवा का सोहागपुर साहित्य परिषद द्वारा सम्मान किया गया। आयोजन के दूसरे चरण में कवियों द्वारा गोष्ठी में काव्य पाठ किया गया।
आयोजन में नगर के साहित्यकारों, वरिष्ठजनों सहित बडी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पिपरिया से आए कवि अवधेश शर्मा ने किया।

इन्होंने किया काव्य पाठ
काव्य गोष्ठी में डॉ. अरविंद सिंह चौहान ने 'चलो चलें एक नई शुरुवात करें, जिनसे बात नहीं होती, उनसे बात करें, पं. राजेंद्र सहारिया ने 'अपनी आंखों में बसाकर देखो, मुझे भी तो आजमाकर देखो, नारायण श्रीवास्तव ने 'पुरातत्व की आयु प्राप्त मेरा निजी मकान, अब संग्रहालय है।डॉ. दुर्गाप्रसाद कहार ने 'कौन बांध पाया है, मन को बातों में, कुछ समझ नहीं आता क्या है इरादों में, शरद व्यास ने आज भी छुट्टी, कल भी छुट्टी, परसों फिर इतवार है, किना प्यारा हफ्ता है, छुट्टी की भरमार है, मथुराप्रसाद जोशी ने बेईमानी और धोखे का हुआ व्यापार आपस में, नहला दहले से बोला न तुम कच्चे-न हम कच्चे, दयाशंकर शर्मा ने 'मेरे नगर की पहचान, सुराही, परमल और पान, अवधेश शर्मा ने शब्दों के अंगार पिरो दो कविता में, रक्त कणों के तार पिरो दो कविता में, अभिलाष सिंह चंदेल ने तुम्हें एकांत कैसा लगता है हमारे बगैर, राजेश शुक्ला ने 'मैंने हिंदी टीचर से पूछा स वर्ण कौन सा है, टीचर ने कहा स तो सवर्ण है, जितेंद्र शर्मा, जीत- ने देश जो अखंड था, प्रचंड मार्तंड था, विचार बदले जब यहां क्या हो रहा है देश में, प्रबुद्ध दुबे दीप ने कभी मूल्य आसमान छूते थे, आज धराशायी हैं, फिर भी लोग चिल्लाते हैं महंगाई है, प्रज्ञा जायसवाल ने 'मां शारदे तुम्हारी बेटी बुला रही है, करे वंदना तुम्हार, तुमको मना रही है, संदीप चतुर्वेदी- 'जिस्म को लूटने वाले हिंदुस्तान में जल्लाद बैठे हैं एवं अमित बिल्लौरे अमृत ने 'वो रहता है सदा खुश मिजाज, गम सिगड़ी में फूंककर तापता होगा, नन्हीं आंखों को बेच देता है ख्वाब, रोज गुल्लक का वजन भांपता होगा।Ó

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