स्कूल की पढ़ाई के साथ सीखीं अभिनय की बारीकियां

- सेठानी घाट पर जारी श्री रामलीला महोत्सव में स्कूली विद्यार्थी निभा रहे मुख्य पात्रों की भूमिका

By: rajendra parihar

Published: 08 Oct 2021, 11:04 AM IST

होशंगाबाद- सतसंग भवन जारी रामलीला 131 साल पुरानी होने के साथ इसके कलाकार भी अपने आप में एक परंपरा निभा रहे हैं। रामलीला की चौपाईयां कलाकारों को ऐसी भाई कि इसमें पीढिय़ां गुजर गई। वर्तमान में रामलीला के मुख्य किरदार निभाने वाले कलाकार भी इन्हीं में से एक हैं। इन कलाकारों के पिता और दादा सहित परिवार के अन्य सदस्य भी किसी न किसी रूप में रामलीला महोत्सव से जुड़े रहे हैं। वहीं स्कूली विद्यार्थी रामलीला में मुख्य पात्रों की भूमिका निभा रहेे हैं। स्कूल की पढ़ाई के साथ ही इन युवाओं ने अभिनय की बारीकियां भी सीखी हैं।
ेरामलीला के प्रमुख किरदारों का परिचय(सभी की फोटो नाम से सेव हैं)
नाम- प्रद्युुम्न दुबे
पात्र- श्रीराम
केप्शन- 11वीं कक्षा का विद्यार्थी है। बीते चार साल सेे रामलीला में अभियन कर रहा है। पिता भी रामलीला में अभिनय करते रहेे हैं।
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नाम- अक्षय मिश्रा
पात्र- सीता
केप्शन- 8वीं का विद्यार्थी है। रामलीला से बचपन से ही जुड़ा है और बीते दो साल से रामलीला में अभिनय कर रहा है।
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नाम- अनिकेत दुबे
पात्र- लक्ष्मण
केप्शन- 11वीं का विद्यार्थी है और बीते 3 साल से रामलीला में अभिनय कर रहा है। इनके पिता भी रामलीला में अभिनय करते रहेे हैं।
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नाम- यथार्थ तिवारी
पात्र- भरत
केप्शन- 11वीं का विद्यार्थी है और 5 साल से रामलीला में अभिनय कर रहा हैं। पिता भी रामलीला में निर्देशक के रूप में शामिल रहे हैं।
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नाम-अक्षत तिवारी
पात्र- शत्रुघ्न
केप्शन- 9वीं का विद्यार्थी है। बीते सात साल से रामलीला में कई पात्रों का अभिनय किया। दो भाई और चाचा भी रामलीला अभिनय कर चुके हैं।
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श्रीराम ने पिनाक की प्रत्यंचा को चढ़ाकर जीता स्वयंवर
गुरुवार को रामलीला महोत्सव के दौरान धनुष यज्ञ प्रसंग का मंचन किया गया। श्री रामचरितमानस के अनुसार महाराजा जनक के पास भगवान शंकर द्वारा प्रदत्त पिनाक नामक दिव्य धनुष था। वह महल में जिस स्थान पर स्थापित था वहां से कोई उसे हिला नहीं सकता था लेकिन एक दिन जनक नंदनी सीता ने धनुष को उठा लिया था, राजा जनक को आभास हुआ कि सीता में कोई अलौकिक शक्ति है। इसलिए महाराज जनक ने निश्चय किया कि सीता का विवाह ऐसे पराक्रमी राजकुमार से किया जाएगा जो उस धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा को चढ़ाएगा । सीता के स्वयंवर का आयोजन रखा गया और प्रतिज्ञा की घोषणा कर राज्यों के पराक्रमी पुरुषों और राजाओं को निमंत्रण भेजा गया। श्रीराम और लक्ष्मण भी गुरु विश्वामित्र के साथ के स्वयंवर में पहुंचते हैं इस लीला की प्रस्तुति बड़े ही रोचक प्रभावी शैली से की गई रंगमंच में पिनाक धनुष को सजा कर रखा गया और देश देशांतर के अनेक राजा उस सभा में उपस्थित हुए। इसमें श्रोणितपुर के बाणासुर, लंकाधिपति रावण ,साधु ,राजा और सभी राजा क्रमश: शक्ति प्रदर्शन करते हैं। वह सभी असफल होकर बैठ जाते हैं धनुष भंग नहीं कर पाते हैं और रावण सभा में गर्जना करते हुए घोषणा करता है कि भले ही सीता को वह स्वयंवर में प्राप्त नहीं कर सका लेकिन एक न एक दिन वह सीता को लंका ले जाएगा । राजा जनक बाणासुर पर रावण को असफल देखकर चिंतित होते हैं। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम भगवान शंकर के पिनाक धनुष को प्रत्यंचा चढ़ा कर भंग कर देते हैं और माता सीता श्रीराम को वरमाला पहनाती हैं।

rajendra parihar Reporting
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