रेलवे यात्रियों को 15 मिनट पहले पहुंचाने के चक्कर में जान से कर रहा खिलावाड़

भोपाल-होशंगाबाद के बीच बढ़ेगी ट्रेन की रफ्तार बुधनी-बरखेड़ा घाट सेक्शन होगा खत्म

By: poonam soni

Published: 19 Jan 2019, 11:59 AM IST

होशंगाबाद. रेलवे बुधनी-बरखेड़ा घाट सेक्शन खत्म करने जा रहा है। इसके आदेश भी जारी हो गए हैं, लेकिन अभी अमल शुरू नहीं हुआ। घाट सेक्शन समाप्त होने से करीब बीस किलोमीटर के इस क्षेत्र में भी ट्रेनों की रफ्तार तेज हो सकेगी। इससे भोपाल और होशंगाबाद के बीच ट्रेन के समय में 15 मिनट की बचत होगी। लेकिन रेलवे की यूनियन इसका विरोध कर रही है। वजह बताई जा रही है कि इससे यात्रियों की जान खतरे में पड़ जाएगी। रफ्तार बढऩे से ट्रेन हादसे हो सकते हैं। रेलवे सूत्र बताते हैं कि अब तक बुधनी-बरखेड़ा के बीच की दूरी को घाट सेक्शन का दर्जा मिला हुआ है। इससे इस करीब 20 किलोमीटर की दूरी में ट्रेन की रफ्तार 30 किमी प्रति घंटे से ज्यादा नहीं रहती है। साथ ही घाट पर ट्रेन चलाने का प्रशिक्षण ले चुके ड्राइवर को वहां से ट्रेन निकालने का अधिकार होता है। इस क्षेत्र में स्पीड सेंसिंग डिवाइस लगी है, जिससे ट्रेन की रफ्तार तय मानक से अधिक होने से पर उसे आगे का सिग्नल ही नहीं मिलेगा, लेकिन घाट सेक्शन समाप्त करने से यह सब खत्म होगा और ट्रेन की रफ्तार बढ़ेगी। इससे दुर्घटना होने की संभावना है, क्योंकि बुदनी से बरखेड़ा के बीच कई जगह खतरनाक खाई हैं।
रेलवे के ऑपरेटिंग विभाग ने एक पखवाड़े पूर्व घाट सेक्शन हटाने का आदेश जारी किया है। आदेश में कहा है कि बुधनी-बरखेड़ा को घाट सेक्शन का दर्जा नहीं दिया जाएगा। इसकी भनक लगते ही मंडल में हड़कंप मचा गया। कर्मचारी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के मंडल सचिव आरके यादव ने रेलवे को पत्र लिख कर विरोध जताया है। अन्य संगठनों ने भी आदेश को वापस लेने की मांग की है। बुधवार को एजीएम के इटारसी आने पर विरोध जताया था।
मानक टू घाट का है दर्जा
रेलवे में दो तरह के घाटों को घाट सेक्शन का दर्जा दिया गया है। पहला घाट सेक्शन क्लास वन मानक का है जिसमें 40 मीटर में 1 मीटर का उतार होता है। वहीं दूसरा घाट सेक्शन क्लास टू मानक का है, जिसमें 80 मीटर में 1 मीटर का पैमाना होता है। बुदनी से बरखेड़ा के बीच करीब 20 किमी की दूरी के इस सेक्शन में डाउन ग्रेडियंट है और इसे क्लास-2 सेक्शन का दर्जा मिला हुआ है।
..घाट सेक्शन को खत्म करने के आदेश को अभी होल्ड पर करने के संबध्ंा में विचार चल रहा है। इस मामले मंे पहले पूरी पड़ताल कराने की योजना है। उसके बाद इस मामले में आगे कदम बढ़ाया जाएगा।
अंशुल गुप्ता, एजीएम जबलपुर जोन
यह होगा नुकसान
लेकिन घाट सेक्शन खत्म करने से यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। हादसे होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। स्पीड सेंसिंग डिवाइस हटाने से ज्यादा स्पीड होने पर सिग्नल मिलने लगेंगे और ट्रेन रूक नहीं पाएगी। यह डिवाइस केवल घाट सेक्शन में लगती है। जिससे ३० किमी प्रति घंटा की स्पीड से ज्यादा रफ्तार होने पर सिंग्नल ही नहीं आते हैं जिससे ट्रेन नहीं चल पाती है। घाट सेक्शन में ट्रेन चलाने से पहले दी जाने वाली ट्रेनिंग बंद हो जाएगी, जिससे बिना ट्रेनिंग वाले लोको पायलट भी इस सेक्शन में ट्रेन चलाएंगे। सेक्शन में यदि ट्रेनों को स्पीड बढ़ाकर चलाया जाता है तो घाट सेक्शन में ट्रेन चलाने का अनुभव नहीं होने से ट्रेन कैच साइङ्क्षडग में लटकने का खतरा बढ़ेगा। ट्रेनों का करीब ११०० से लेकर ५३०० टन का लोड इस रूट पर रहेगा और ट्रेनों की ज्यादा स्पीड इस क्षेत्र में खतरनाक हो सकती है। अभी लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट को घाट एलाउंस मिलता है। यह घाट अलाउंस नार्मल किमी का तीन गुना तक भुगतान किया जाता है। घाट सेक्शन का दर्जा हटने से कर्मचारियों को भी भत्तों का नुकसान होगा।
यह होगा फायदा, बचेगा समय
दर्जा खत्म होने से ट्रेनों की स्पीड में बढ़ेगी। इससे भोपाल से इटारसी के बीच 90 किमी की दूरी तय करने में करीब 15 से 20 मिनट का फर्क आ सकता है। इसी फायदे को देखते हुए यह आदेश निकाला है। साथ ही घाट सेक्शन के लिए अलग से रेलवे कर्मचारियों, ड्राइवरों को भत्ता, ट्रेनिंग आदि दी जाती है। इससे भी रेलवे की बचत होगी।
1. बुदनी-बरखेड़ा घाट सेक्शन का दर्जा खत्म करने का आदेश यात्रियों की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ है। इससे बड़ा हादसा हो सकता है। हमने मंडल स्तर पर पहले ही विरोध दर्ज करा चुके हैं। एजीएम को भी संगठन के विरोध से अवगत कराया गया है। उन्होंने इस आदेश को अभी लागू नहीं कराने का आश्वासन दिया है।
आरके यादव, मंडल सचिव डब्ल्यूसीआरएमएस

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