scriptThe straw was consumed by the fire of Narwai, the crisis on the cattle | नरवाई की आग लील गई भूसा, मवेशियों पर संकट गहराया | Patrika News

नरवाई की आग लील गई भूसा, मवेशियों पर संकट गहराया

मशीनों की कमी, नहर जल्दी छूटने व नरवाई जलने से भूसे का संकट गहराया, गर्मी की तपन के बीच भूसा, चारा-पानी और शेड के अभाव में मवेशी बेहाल

होशंगाबाद

Published: April 09, 2022 08:10:14 pm

नर्मदापुरम. जिले में प्रशासन एवं कृषि विभाग की पाठशालाओं में तमाम समझाइश, जागरूकता अभियान चलाने के बाद भी नरवाई की आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। बीते सप्ताह में नरवाई की आग ने भूसा को भी लील लिया। भूसा दान करने के बजाए हालत ये है कि किसान खुद के पालतू पशुओं के लिए भी 25 फीसदी भूसा अब तक नहीं बना पाए हैं। अगर नरवाई ऐसे ही जलती रही तो जिले में आगामी माहों में भूसा का संकट भी पैदा हो जाएगा। गर्मी की तपन के बीच भूसा, चारा-पानी और शेडों के अभाव और मौसमी बीमारी एवं रतौंधी में गौशालाओं में भी मवेशियों की हालत बिगड़ रही है। मौत भी शुरू हो गई है। जिला मुख्यालय की ही कुछ गौशाला खाली पड़ी है। शहर की ही सड़कों पर करीब तीन से चार हजार आवारा मवेशी बेहाल घूम रहे हैं।

भूसा दान नहीं कर पा रहे किसान
जिले में भूखे-प्यासे मवेशियों के लिए किसान गौशालाओं में भूसा दान नहीं कर पा रहे हैं। सिवनीमालवा तहसील को ही लें तो यहां गेहूं की कटाई के बाद अधिकांश खेतों की नरवाई आग के हवाले कर दिए जाने से जलकर राख हो चुकी है। ऐसा खाली खेतों वाले किसानों व्दारा गेहूं की कटाई पूरी होने से पहले ही नहरें जल्दी चालू होने एवं मशीनों की कमी समय के अभाव, जल्दबाजी में ज्यादातर रकबे की नरवाई से भूसा बनाने एवं बखरने के बजाए जला दी गई। यहां के किसान संतोष पटवारे बताते हैं कि वह इस बार सिर्फ 15 ट्रॉली भूसा ही बना सके हैं, जो खुद के दुधारू पशुओं के लिए कम पड़ेगा, जबकि बीते साल 25 ट्रॉली भूसा बनाया था। सिवनीमालवा-बानापुरा और शिवपुर क्षेत्र में आधा दर्जन गौशालाएं हैं। इनमें रह रहे मवेशियों के भी चारे का संकट अभी से पैदा हो गया है। नर्मदापुरम ब्लॉक के किसान हरपाल सिंह सोलंकी का कहना था कि वह गौशालाओं को भूसा दान करना चाहते थे, लेकिन उनके गांव सहित सुपरली आसपास के किसान ज्यादातर खेतों की नरवाई जलने के कारण भूसा नहीं बन सके। यही स्थिति डोलरिया तहसील की भी है। इधर, ग्राम काजलखेड़ी के किसान उदय कुमार पांडे ने बताया कि उनके ब्लॉक माखननगर में कुल 115 गांव आते हैं। वह और अन्य किसान भी गौशाला को भूसा देना चाहते थे, लेकिन आगजनी के कारण 25 फीसदी भूसा भी नहीं बना सके हैं। भूसा नहीं बनने का एक मुख्य कारण मशीनों की कमी भी बताई गई है। मूंग की बोवनी व बाईं मुख्य तट नहरों के चालू होने के कारण भी भूसा नहीं बन सका।

ये है मुख्यालय की गौशाला के हाल
जिला मुख्यालय की गौशालाओं के हाल बेहाल हैं। कुलामढ़ी रोड नपा के फिल्टर प्लांट के सामने की गौशाला खाली पड़ी है, क्योंकि यहां शेडों की कमी है। तेज धूप एवं चारा-पानी के इंतजाम नहीं होने से यहां आवारा मवेशियों को नहीं रखा जा रहा। गौशाला के आसपास झुग्गियों के अतिक्रमण भी बढ़ गए हैं। शहर से ही जुड़ी बांद्राभान रोड, गुरुकुल के पास की गौशाला में भी मवेशियों की संख्या कम होते जा रही है।
नरवाई की आग लील गई भूसा, मवेशियों पर संकट गहराया
नरवाई की आग लील गई भूसा, मवेशियों पर संकट गहराया
रतौंधी के कारण गश्त खाकर गिर रहे मवेशी
गौसेवक गजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी एवं मौसमी बीमारी के कारण सड़कों पर घूम रहे गौवंश-आवारा मवेशी रतौंधी के कारण गश्त खाकर गिर एवं बेहोश हो रहे हैं। रसूलिया में बीते दिवस इस वजह से मवेशी की मौत भी हुई है। मवेशियों को चारा-पानी नहीं मिलने से भी भूख-प्यास के कारण मवेशियों के जीवन पर संकट बढ़ रहा है।

एक से डेढ़ हजार क्षमता की गौशाला की जरूरत
गौसेवकों ने बताया कि शहर में आवारा मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में ही तीन से चार हजार मवेशी सड़क-चौराहों एवं रहवासी इलाकों में विचरण कर रहे। इन मवेशियों के जीवन को बचाने व पालन-पोषण, देखभाल के लिए शहर में एक से डेढ़ हजार क्षमता की बड़ी गौशाला का निर्माण होना चाहिए, ताकि नगरपालिका इन्हें पकड़कर इसमें रख सके।
जिले में कुल 23 गौशालाएं, सुविधाओं की कमी
जिले में कुल 23 गौशालाएं संचालित हो रही है। इनमें अशासकीय स्वयंसेवी गौशालाओं की संख्या आठ एवं मुख्यमंत्री गौशाला योजना की 15 गौशालाएं शामिल है। इनमें मात्र 2 हजार 23 मवेशी ही रह पा रहे, जबकि मवेशियों की संख्या करीब 80 से 85 हजार के आसपास है।

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