सूदखोर को नहीं मिली कोर्ट से रहम, जाने क्या था मामला...

तंग आकर 56 वर्षीय ने उठाया था एेसा कदम, एक साल बाद दर्ज हुआ था केस

इटारसी। अदालत ने एक सूदखोर की जमानत अर्जी अर्जी को खारिज कर दिया। उसकी प्रताडऩा से तंग आकर एक ५६ वर्षीय व्यक्ति ने ट्रेन के सामने छलांग लगा दी थी। आरोपी उसे लगातार परेशान कर रहा था। इस मामले में एक साल बाद पुलिस ने उसे आरोपी मानते हुए अपराध दर्ज कर गिरफ्तार किया था। वह अभी जेल में है। मामला इटारसी थाना क्षेत्र का है।
नहीं मिला था सुसाइड नोट
सूदखोर की प्रताडऩा से तंग ५६ वर्षीय प्रवीण तिवारी की आत्महत्या के मामले में आरोपी जितेंद्र भट्ट की जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई हुई। आरोपी के वकील ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए कहा कि आत्महत्या मामले में एक साल बाद अपराध दर्ज किया गया है। इसके अलावा मृतक के पास से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। इसलिए जमानत दी जाए। मामले में शासकीय अधिवक्ता भूरेसिंह भदौरिया ने विरोध दर्ज करते हुए न्यायालय को बताया कि आरोपी कुख्यात सूदखोर है। पुलिस ने उसके पास से बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां, चेक बुक, पास बुक जब्त किया है। जिसके बाद मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश संजय पांडे ने सुनवाई करते हुए अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।

एक साल बाद हुआ था प्रकरण दर्ज

शासकीय अधिवक्ता भूरेसिंह भदौरिया ने बताया कि मेहरागांव निवासी प्रवीण तिवारी (56) ने इसी गांव में रहने सूदखोर जीतेंद्र भट्ट से कर्ज लिया था। जिसे वह अदा कर चुका था। बावजूद इसके उसे प्रताडि़त किया जा रहा था। जिससे तंग आकर उसने 27 फरवरी 2019 को रेल से कटकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस विवेचना के चलते घटना के बाद से आरोपी फरार था। मामले में पुलिस ने 4 मई 2020 को आरोपी जितेंद्र भट्ट के खिलाफ धारा ३०६ व २५ आम्र्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया। विवेचना अधिकारी पंकज वाडेकर ने आरोपी को दमोह जिले के तेंदुखेड़ा से गिरफ्तार कर इटारसी न्यायालय में पेश किया था। जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

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बृजेश चौकसे Editorial Incharge
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