आखिर क्यों किन्नरों को भेज दिया जेल

यात्री की शिकायत पर जीआरपी ने मामला दर्ज कर इन किन्नरों को न्यायालय पेश किया, तो जमानत खारिज होने पर किन्नरों को जेल भेज दिया।

By: Shakeel Niyazi

Published: 11 Sep 2017, 11:07 PM IST

पिपरिया। ट्रेन यात्रियों से अड़ीबाजी कर जबरन पैसा वसूली और बेहूदा प्रदर्शन करना दो किन्नरों को भारी पड़ गया। दरअसल यात्री की शिकायत पर जीआरपी ने मामला दर्ज कर इन किन्नरों को न्यायालय पेश किया, तो जमानत खारिज होने पर किन्नरों को जेल भेज दिया। जीआरपी एएसआई आरडी गौतम ने बताया कि ६ सितंबर को राजकोट एक्सप्रेस के जनरल बोगी में एक यात्री के साथ इटारसी के दो किन्नरों ने अड़ीबाजी कर पैसे मांगे। मना करने पर यात्री से झूमाझटकी कर उसके कपड़े फाड़ दिए वही किन्नरों ने बोगी में बेहूदा हरकते की जिससे बोगी के यात्री शर्मशार हो गए। यात्री फहीम कुरैशी बैतूल ने जीआरपी इटारसी में मामला दर्ज करा दिया। गौतम ने बताया कि डायरी मिलने पर आरोपी दो किन्नरों को गिरफ्तार कर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार की अदालत में पेश किया गया लेकिन यहां आरोपियों की जमानत खारिज हो गई। गौतम ने बताया कि दोनो आरोपियों को होशंगाबाद महिला जेल भेज दिया गया।
इधर, तत्कालीन बैंक मैनेजर की अग्रिम जमानत का आवेदन निरस्त
बैतूल जिले के मुलताई में अपर सत्र न्यायाधीश एमएस तोमर के न्यायलय में सोमवार को जौलखे$डा के महाराष्ट्र बैंक में हुए सवा करो$ड रुपए के गबन मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन बैंक मैनेजर विनय पिता नवीनचंद ओझा की अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया गया था। न्यायायल ने बैंक मैनेजर की अग्रमि जमानत का आवेदन निरस्त कर दिया गया। न्यायालय ने उक्त प्रकरण को गंभीर मानते हुए आरोपी बैंक मैनेजर को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया है। अपर लोक अभियोजक भोजराज सिंह रघुवंशी ने बताया कि जौलखे$डा के महाराष्ट्र बैंक के तत्तकालीन बैंक मैनेजर विनय ओझा के कार्यकाल में ही फर्जी खाते खोलकर लगभग सवा करो$ड स्र्पए का गबन कर लिया गया था। पुलिस द्वारा बैंक मैनेजर ओझा के खिलाफ धारा ४२०,१२० बी,३४ भादवि एवं आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया था। रघुवंशी ने बताया कि गिरफ्तार बैंक मैनेजर अभिषेक रत्नम द्वारा अपने बयान में बताया गया है कि सवा करो$ड स्र्पए के गबन में लगभग ६५ लाख स्र्पए विनय ओझा को दिए गए है। ऐसे में न्यायालय ने मामाले में विनय ओझा को अग्रिम जमानत देने से इंकार करते हुए ओझा की ओर से दप्रसं की धारा ४३८ की ओर से लगाया गया आवेदन निरस्त कर दिया गया।

Shakeel Niyazi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned