मानव जाति के लिए खतरा नहीं बांधवगढ़ का बाघ जय

बाघ को मटकुली क्षेत्र से हटाकर एसटीआर के घने जंगल में छोड़ा

By: amit sharma

Published: 10 Feb 2020, 11:52 AM IST

होशंगाबाद। मटकुली के मेहंदीखेड़ा गांव में शुक्रवार को तड़के महिला सुमेरिया सिंह (45) का शिकार करने वाला बाघ जय अब पिंजरे से आजाद कर दिया गया है। जय को पचमढ़ी के घने जंगलों में छोड़ा गया है। बांधवगढ़ से एसटीआर लाए गए जय बाघ को मानव शिकार के 33 घंटे बाद चाकरगांव से पकड़ कर फिर घने जंगलों में आजाद कर दिया गया। सूत्रों की माने तो पहले टीम पचमढ़ी के पास ही बाघ को छोडऩे की तैयारियां कर रही थी। लेकिन अधिकारियों की बैठक के बाद चूरना के जंगलों में इस बार बाघ को छोड़ा गया है। जिससे बाघ रहवासी क्षेत्र में आने की कम स्थिति बने। एसटीआर के संचालक एसके सिंह ने बताया कि बाघ को जंगल में सुरक्षित छोड़ा गया है। कॉलर आईडी वाले इस बाघ की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। जिससे किसी भी तरह की हरकत पर तुरंत विभाग एक्शन में आ सके।

गांव के लोगों में राहत, अब समय से लगेंगे स्कूल
बाघ जय के पकड़े जाने के बाद गांव के लोगों ने राहत ली है, इसके बाद मटकुली, पगारा, विंधाखेड़ा, मेंहदीखेड़ा, पिसुआ, मैली और चंदन पिपरिया के लोग खुश हैं। पहले से लोगों ने दहशत भी कम हो गई है। पिपरिया एसडीएम मदन रघुवंशी ने बताया कि बाघ के पकड़े जाने के बाद लोगों में राहत है। लोगों को जिला प्रशासन ने भरोसा भी दिलाया है कि बाघ को उनके क्षेत्र से काफी दूरी पर छोड़ा जाएगा।

बॉक्स
जंगल में छोड़ते समय जमकर दहाड़ा बाघ

जंगल में छोड़ते समय जमकर बाघ ने दहाड़ मारी, इस दौरान बाघ थोड़ा गुस्से में दिखाई दिया। वो पिंजरे से सीधे छलांग मारते हुए जंगल की ओर भाग निकला। जिसके बाद एसटीआर की टीम चैन की सांस लेकर वापस लौटी। वहीं बाघ की मॉनिटरिंग के लिए दस कर्मचारियों का लगाया गया है। जोकि कॉलर आईडी से बाघ की लोकेशन की जानकारी रखेंगे।
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आदमखोर के उपयोग पर लग चुकी है रोक

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने बाघ को आदमखोर कहने पर पहले ही रोक लगा चुकी है। एनटीसीए ने निर्देश जारी किए हैं कि अब बाघ के नाम के साथ आदमखोर शब्द का उल्लेख नहीं किया जाएगा। अगर ऐसा बाघ जो इंसानों के लिए खतरा पैदा कर सकता है, उसके नाम के साथ मानव जाति के लिए खतरा शब्द का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। एेसे में एसटीआर के अधिकारियों का कहना है कि यह एेसा बाघ नहीं है जिसे मानव जाति पर खतरे के तौर पर देखा जाए।
इनका कहना है

बाघ में एेसे कोई भी लक्षण नहीं थे, जो मानव जाति के लिए खतरा पैदा करने वाले हों, महिला पर बाघ ने अपनी प्रवत्ती के अनुरूप हमला किया है। एेसे में बाघ को सुरक्षित एसटीआर के ही घने जंगलों में छोड़ा गया है। इसकी कॉलर आईडी से मॉनिटरिंग की जाएगी।- एसके सिंह, संचालक एसटीआर होशंागबाद

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