....तो छेड़ दीजिए शुद्धिकरण का युद्ध

नपाध्यक्ष की बर्खास्तगी से होशंगागाद में हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी सियासत का पारा चढ़ा हुआ है।

ब्रजेश चौकसे/ होशंगाबाद। नपाध्यक्ष की बर्खास्तगी से होशंगागाद में हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी सियासत का पारा चढ़ा हुआ है। आर्थिक अनियमितताओं के आरोप में हटाने के कारण मुद्दाविहीन एवं शांत बैठे कांग्रेसियों को मसाला हाथ लग गया। भाजपा ने जिस तर्ज पर उनके एक शीर्ष नेता के गुजरने पर सड़क धोकर उसका शुद्धिकरण किया था, ठीक वैसे ही कांग्रेसियों ने नपा में जिस कुर्सी पर अध्यक्ष विराजमान होते हैं, उसका नर्मदा जल और मंत्रोच्चारण से शुद्धिकरण कराया। खैर यह महज एक सियासी ढकोसला भर है। ऐसा पहले भी होता रहा है और आगे भी जारी रहेगा। यह लोकतंत्र में विरोध का एक तरीका हो सकता है, इसमें न कोई बुराई है और न किसी को अपत्ति। लेकिन एक सवाल जरूर उठता है कि क्या हम एक बार भी राजनीति से अलहदा असल में शुद्धिकरण का युद्ध नहीं छेड़ सकते। क्यों नहीं, इस युवा शक्ति की उर्जा सही दिशा में लगाते। यदि हम सच्चे जनसेवक, अफसर और नागरिक हैं तो क्यों नहीं सिस्टम से लेकर सड़क तक, हर तरफ जड़ें जमा चुकी अशुद्धि को साफ करने युद्ध छेड़ें। शहर और जिले में हो रहे हर गलत और अनैतिक कार्य के खिलाफ निडर, निस्वार्थ और बिना राग-द्वेष के बिगुल फूंकें। उन अफसरों को शुद्धता के लिए मजबूर करें, जो आंख पर पट्टी बांधकर वातानुकूलित कक्ष में आराम फरमा रहे हैं। अपने आस-पास हो रहे गलत काम का भी इसी तरह विरोध करें। सड़क पर चल रहे निर्माण कार्य हो या शहर में गंदगी और अतिक्रमण से लेकर अपराध और अव्यवस्था तक सब पर मुखर होकर जिम्मेदारों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास दिलाएं। उन्हें शुद्धिकरण के लिए मजबूर करें। ऐसा हुआ तो हर विभाग हर तरफ शुद्धिकरण का युद्ध छेडऩे मजबूर होगा। विभाग भी अपने स्तर पर शुद्धिकरण करें। पुलिस, गुंडे-बदमाशों और माफिया के खिलाफ कार्रवाई कर जिले को शुद्ध करे। प्रशासन सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से लेकर रसूखदारों के बेजा कब्जे से मुक्त कराए। अस्पताल में अव्यवस्था और असुविधा से निजात मिले। नपा शहर को गंदगी से मुक्त करे और नर्मदा को प्रदूषित होने से बचाए। आरटीओ और ट्रैफिक महकमा महज सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाने की रस्मअदायगी तक सीमित न रहे, बल्कि यातायात व्यवस्था सुगम बनाए। इस तरह हर विभाग अपनी जिम्मेदारी का इमानदारी से निर्वाहन कर सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'शुद्ध के लिए युद्धÓ में अपने नेक काम की अहुतियां छोड़े। और हम सब अपने-अपने कर्तव्य और एक अच्छे नागरिक होने का फर्ज अदा कर इस युद्ध को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने का जतन करते हुए अपना सहयोग दें। फिर चाहे राजनीति में व्याप्त अशुद्धता हो या फिर नौकरशाही में, उसके खात्मे का जतन करने विरोध का ढंका बजाते रहें। साथ ही राजनीति में स्वयं का विकास करने वाले नेताओं की रवानगी का वीणा उठाएं तो दूसरी तरफ विकास और अच्छे काम करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए वैसे ही अपना समर्थन दें, जिस तरह गलत करने वालों का विरोध करते हैं। तभी सही मायने में शुद्धिकरण होगा न कि शुद्धिकरण की राजनीति।

बृजेश चौकसे Editorial Incharge
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