स्कूलों का निरीक्षण करना है तो, लगाओ 3०० किलोमीटर का फेरा

निरीक्षण करना हो तो शिक्षा विभाग अधिकारियों को करीब 300 किलोमीटर का एक चक्र पूर्ण करना पड़ता है।

By: sandeep nayak

Published: 11 Dec 2017, 11:56 AM IST

अमित बिल्लौरे/सोहागपुर. जिले की सोहागपुर तहसील प्रदेश की सबसे पुरानी तहसील है। जिसकी तहसीली सीमा का तो परिसीमन हुआ है, लेकिन ब्लॉक स्तर पर परिसीमन न होने के कारण सतपुड़ा टाईगर रिजर्व के कुछ स्कूल अभी भी सोहागपुर ब्लॉक मेें शामिल हैं। जहां निरीक्षण करना हो तो शिक्षा विभाग अधिकारियों को करीब 300 किलोमीटर का एक चक्र पूर्ण करना पड़ता है। दरकार है कि जिला प्रशासन परिसीमन करे तो शिक्षकों सहित अधिकारियों की समस्या का हल निकल सकेगा।
सतपुड़ा टाईगर रिजर्व से कई गांवों का विस्थापन हो चुका है, जो कि सोहागपुर ब्लॉक में आते थे। इनके साथ उनमें संचालित स्कूलों का भी विस्थापन हो गया। लेकिन अभी भी सोहागपुर ब्लॉक के सात स्कूल एसटीआर मेें ही संचालित होते हैं, जहां के शिक्षकों व शिक्षा विभाग अधिकारियों को विभागीय कामकाज के लिए बड़ी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। जो कि सोहागपुर से प्रदेश की राजधानी भोपाल की दूरी से भी अधिक पड़ती है। बड़ी समस्या यह भी है कि सात स्कूलों के निरीक्षण के लिए जब भी अधिकारी एसटीआर में जाते हैें तो उनका पूरा एक दिन व रात का कुछ समय लग जाता है। सुबह छह बजे यदि निरीक्षण के लिए सोहागपुर ब्लॉक मुख्यालय से जाया जाए, तो निरीक्षण करने के बाद वापसी रात ८ बजे के लगभग ही हो पाती है ऐसे में हजारों रुपए का ईंधन भी चौपहिया वाहन में फूंकना पड़ता है।
एसटीआर में अब भी संचालित होते सोहागपुर ब्लॉक के सात शासकीय स्कूल
ब्लॉक परिसीमन ही शिक्षकों, अधिकारियों की समस्या का एकमात्र हल
ब्लॉक का नहीं हो सका परिवर्तन, होती है शिक्षकों-अधिकारियों को परेशानी
नाव मेें बैठना मजबूरी
गत दिनों ही बीआरसी कार्यालय से जनशिक्षक व बीएसी प्रतिभा पर्व के सत्यापन के लिए झालई, खामदा, सुपलई व मल्लूपुरा के स्कूलों में पहुंचे थे। सोहागपुर से सुबह करीब आठ बजे चौपहिया वाहन से रवाना हुआ शिक्षा विभाग का दल निरीक्षण के उपरांत रात करीब आठ बजे वापिस सोहागपुर पहुंच सका। करीब तीन से चार किमी तवा डैम का बैक वाटर क्षेत्र पड़ता है। जिसके लिए नाव लेनी पड़ती है। वहंी यदि भौंरा से जाएं तो नाव का सहारा नहीं लेना पड़ता। लेकिन भौंरा की ओर से आने-जाने में लगभग 50 किलोमीटर का लंबा फेरा लगाना पड़ता है।
ये स्कूल एसटीआर मेें
बीआरसी कार्यालय के मुताबिक सुपलई प्रायमरी व मिडिल, मालनी के प्रायमरी व मिडिल सहित खामदा, झालई व मल्लूपुरा के प्रायमरी स्कूल वर्षों से सोहागपुर ब्लॉक में शामिल हैं। स्कूलों को समीप के केसला ब्लॉक में शामिल नहीं किया जा सका है। या फिर विस्थापन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पा रही है, ताकि जब ये स्कूल विस्थापन उपरांत किसी अन्य ब्लॉक में ग्राम सहित विस्थापित हों तो वहां की प्रशासनिक व्यवस्था का अंग बन जाए।
जिला मुख्यालय करीब
ब्लॉक के शिक्षकों व अधिकारियों के अनुसार एसटीआर के ७ स्कूलों से जिला मुख्यालय करीब पड़ता है व ब्लॉक मुख्यालय दूर, क्योंकि जब अधिकारियों को इन स्कूलों के निरीक्षण को जाना हो तो उन्हें बाबई, तवा पुल, पांजरा, इटारसी व केसला होते हुए चौपहिया वाहन से जाते है। यह दूरी 150 किमी के लगभग है। केसला से आगे भौंरा होते हुए जाएं तो यह दूरी 170 किमी से अधिक है। ऐसे में स्कूल से सोहागपुर व सोहागपुर से स्कूल का एक पूर्ण चक्र कम से कम 300 किमी का पड़ता है।
तहसील इटारसी, ब्लॉक सोहागपुर
राजस्व विभाग के अनुसार वर्ष 2011-12 में तहसील का परिसीमन होने पर एसटीआर के कुछ गांव तहसीली आधार पर इटारसी में शामिल हैं। लेकिन ब्लॉक की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत ये सोहागपुर में शामिल हैं। जिसके चलते तहसील से जुड़े कामकाज के लिए ग्रामीण, विद्यार्थीै व शिक्षक इटारसी जाते हैं। लेकिन जब ब्लॉक से जुड़ी प्रशासनिक समस्या हो या कोई कामकाज हो तो उन्हें सोहागपुर की लंबी दौड़ लगानी पड़ती है। जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान ही नहीं है।
बात तो सही है कि शिक्षकों व अधिकारियों को सोहागपुर ब्लॉक मेें एसटीआर क्षेत्र में संचालित स्कूलों तक आने-जाने में परेशानी होती है। इसके लिए जरूरी है कि ब्लॉक का परिसीमन हो। जिसके लिए राजस्व विभाग को पहल करनी होगी। बीआरसी के माध्यम से स्कूलों को अन्य ब्लॉक में शामिल करने का प्रस्ताव भेज सकते हैं। लेकिन परिसीमन ही एकमात्र हल है।
अरविंद चौरगढ़े, जिला शिक्षा अधिकारी

sandeep nayak Desk/Reporting
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