आजादी के बाद 20 साल प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही यह जगह अब है देश का फेमस हिल स्टेशन, पढ़ें पूरी खबर

आजादी के बाद 20 साल प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही यह जगह अब है देश का फेमस हिल स्टेशन, पढ़ें पूरी खबर

sandeep nayak | Publish: Mar, 14 2018 12:54:20 PM (IST) Hoshangabad, Madhya Pradesh, India

पचमढ़ी में ग्रीष्मकालीन राजधानी को देखते हुए राजभवन, सीएम आवास और अन्य बंगले भी बनाए गए

होशंगाबाद। प्रदेश की राजधानी का नाम लेते ही जुबान पर भोपाल का नाम आ जाता है। कम ही लोग जानते हैं एक समय ऐसा भी था कि जब प्रदेश की दो राजधानियां हुआ करती थीं। जीहां यह बात बिलकुल सही है। दरअसल आजादी के ठीक बाद जब मध्यप्रदेश का गठन किया गया तो इसकी राजधानी भोपाल को बनाया गया। वहीं ग्रीष्मकाल के दौरान इस राजधानी को बदल दिया जाता था।

20 साल तक चला सिलसिला
आजादी के बाद प्रदेश की राजधानी भोपाल और ग्रीष्मकालीन राजधानी वर्तमान हिल स्टेशन पचमढ़ी को बनाया गया था। गर्मियां आते ही सूबे की राजधानी भोपाल से पचमढ़ी चली जाती थी, इसका उद्देश्य प्राकृति के बीच काम करना था। जिसके चलते पचमढ़ी में राज्यपाल के लिए राजभवन, मुख्यमंत्री निवास और मंत्रियों तथा अफसरों के लिए ढेर सारे बंगले थे।

स्व. गोविंद नारायण ने बदली परंपरा
राजधानी को भोपाल से पचमढ़ी ले जाने का यह सिलसिला आजादी के बाद २० साल तक चला। इसमें काफी खर्च भी होता था। इसे देखते हुए स्वर्गीय गोविंद नारायण सिंह के नेतृत्व में बनीं सरकार ने गर्मियों मे राजधानी पचमढ़ी शिफ्ट करने की प्रथा समाप्त कर दी और फिर साल-1967 के बाद राजधानी को पचमढ़ी नहीं ले जाया गया।

 

मध्यप्रदेश में हैं दो-दो राजभवन
आजादी के बाद जब प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी पचमढ़ी को बनाया तो वहां पर राजभवन का निर्माण भी कराया गया था। इसके अलावा मुख्यमंत्री निवास और मंत्रियों तथा अफसरों के लिए ढेर सारे बंगले भी बनाए गए थे। पचमढ़ी का राजभवन 22.84 एकड़ मे फैला है। इसमें राज्यपाल निवास के अलावा उनके सेक्रेटरी, एडीसी और स्टाफ के आवास भी हैं। यह राजभवन लगभग वीरान पड़ा रहता है, क्योंकि राज्यपाल तो यहां कभी कभार आते हैं।

विशेष अवसरों पर खुलता है राजभवन
बताया जाता है कि पचमढ़ी के इस राजभवन को विशेष अवसरों पर खोला जाता है। इसे राज्यापाल या राष्ट्रपति के आगमन पर ही खोला जाता है।

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