लापरवाही : डैमेज एप्रान वाले ट्रैक से गुजर रहीं ट्रेनें

रेलवे ने प्लेटफार्म पर घटाई स्पीड, ब्लॉक न मिलने से एप्रान निर्माण का रूका काम।

इटारसी/रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक का एप्रान बुरी तरह डेमेज हो गया है। स्थानीय अधिकारियों ने एप्रान निर्माण करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा है, लेकिन रेलवे से ब्लॉक न मिलने के कारण एप्रान निर्माण नहीं शुरू हो गया है। फिलहाल ट्रेनों को 10 किमी की गति से प्लेटफार्म पर लाया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार प्लेटफार्म एक के अलावा प्लेटफार्म दो-तीन पर भी नए एप्रान बनना है, लेकिन अफसरों का दबाब है कि ट्रेनें समय पर चलाई जाएं। एक रेलवे ट्रेक का एप्रान नए सिरे से बनाने के लिए करीब 45 दिनों का ब्लॉक लगता है, जिसकी मंजूरी रेलवे मंत्रालय से मिलती है। इस कारण डेमेज एप्रान पर ही ट्रेनें लेनी जा रही है।

टूट चुके सिलीपाट, 10 किमी से आ रही ट्रेनें
चारों प्लेटफार्म का एप्रान रेलवे ट्रेक दिनों दिन क्षतिग्रस्त हो रहा है। इसमें सबसे अधिक प्लेटफार्म एक का डैमेज हो चुका है। मुंबई- नागपुर तरफ से दिल्ली तरफ जाने वाली ट्रेनें इसी ट्रैक पर आती है। इसके सिलीपाट तक टूट चुके हैं। ऐसे में हादसे की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। रेलवे ऑपरेटिंग विभाग ने इसी वजह से ट्रेनों के प्लेटफार्म प्रवेश के दौरान इसकी सीमा 15 किमी प्रति घंटे से घटाकर 10 किमी प्रति घंटे कर दी है।

ट्रैक पानी में डूबा
रेलवे ट्रैक से लगी नालियां भी डैमेज होने से क्षतिग्रस्त एप्रान पानी में डूबा रहता है। इस वजह से आधा रेलवे ट्रेक पानी में डूबा रहता है। प्रबंधन ने टूटे सिलीपाट से लाइन को बचाने और जमीन पर ट्रैक धंसने से रोकने जगह-जगह लकड़ी के गुटके फंसाए गए हैं।

ट्रेन एकबार हो चुकी थी बेपटरी
रेलवे की लापरवाही से दो-तीन साल पहले पटना वास्कोडिगामा एक्सप्रेस बेपटरी हुई थी। बावजूद इसके रेलवे ने कोई सबक नहीं लिया। ऐसे में क्षतिग्रस्त हो रहे एप्रान और टूट रहे सिलीपाट के कारण ट्रेनों के वजन से रेलवे ट्रेक पर खतरा बढ़ सकता है।

10 किमी की स्पीड से चल रही ट्रेनें
इंजीनियरिंग विभाग द्वारा टूटे हुए सिलीपाटों एवं पटरियों के नीचे रबर एवं लकडी़ के गुटके फंसाकर काम चला रहे हैं। इसलिए ट्रेनों की प्रवेश की गति 15 किमी की जगह 10 किमी. प्रति घंटे कर दी है। प्लेटफार्म पर प्रवेश करने का काशन आर्डर जारी किया है।
- राजीव चौहान, स्टेशन प्रबंधक, इटारसी।

sandeep nayak Desk/Reporting
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