यह कैसी सुविधा.... तीन दिन में नहीं बन रहे डिजिटल जाति प्रमाण पत्र, महीनों परेशान हो रहे विद्यार्थी

यह कैसी सुविधा.... तीन दिन में नहीं बन रहे डिजिटल जाति प्रमाण पत्र, महीनों परेशान हो रहे विद्यार्थी

govind chouhan | Publish: Sep, 09 2018 07:03:53 PM (IST) Hoshangabad, Hoshangabad, Madhya Pradesh

समय सीमा में हितग्राहियों को नहीं मिल पा रहा योजनाओं का लाभ, फिसड्डी साबित हो रही व्यवस्थाएं

बनखेड़ी. शासन द्वारा लोक सेवा के माध्यम से विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ समय सीमा मेें हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थाओं का निर्धारण किया है। लेकिन यह व्यवस्थाएं फिसड्डी साबित हो रही हैं। इन्हीं में से एक व्यवस्था है तीन दिनों में डिजीटल जाति प्रमाण पत्र जारी करने की की। लेकिन लोक सेवा के माध्यम से हितग्राहियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जानकारी अनुसार सैकड़ों छात्र-छात्राएं डिजिटल प्रमाण पत्र बनवाने के लिए महीनों से चक्कर काट रहे हैं एवं दस्तावेजों के लंबी सूची में उलझकर डिजिटल जाति प्रमाण पत्र से वंचित हैं। बनखेड़ी तहसील कार्यालय के पास स्थित लोक सेवा केंद्र में डिजिटल जाति प्रमाण पत्र बनवाने सूचना एवं आवश्यक दस्तावेजों की सूची चस्पा की गई है जिसमें पटवारी प्रतिवेदन, राजस्व निरीक्षक की सील साइन, परिवार के सदस्यों की जानकारी जिसमें भूमि ,मकान प्लाट, एवं अन्य विस्तृत संपत्ति की छाया प्रति आदि की जानकारी है। बनखेड़ी महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र लक्ष्मी प्रसाद पिता खरगराम ग्राम बनखेड़ी एवं मुरलीधर राय पिता दुर्गा प्रसाद राय निवासी बनखेड़ी महीनों से डिजिटल जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटक रहे हैं जबकि उन्हें यह डिजिटल प्रमाण पत्र स्कॉलरशिप के लिए महाविद्यालय में जमा करना है। दोनों छात्रों का कहना है कि सरकार के नियमानुसार जारी किए गए आवेदन पत्र को भर कर दे रहे हैं उसके बाद भी उनका डिजिटल जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाया जा रहा।

जमा कराते हैं मूल प्रति
हितग्राहियों द्वारा आवेदन जमा करने के समय पुराने स्थाई जाति प्रमाण पत्र की मूल प्रति जमा कराई जाती है। ऐसे में हितग्राहियों को उनकी स्थाई जाति प्रमाण पत्र की मूल प्रति गुम होने का भी खतरा बना हुआ रहता है। इतना ही नहीं आवेदन के साथ हितग्राही से 30 रुपए सेवा शुल्क के लिए जा रहे हैं बावजूद इसके आवेदन जमा करने के बाद हितग्राही को खुद ही अपना आवेदन लेकर अनुविभागीय कार्यालय जाना होता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
हमारे पास अगर पूर्व में जारी जाति प्रमाण पत्र पर अंकित प्रकरण के अनुसार रिकॉर्ड मिलते हैं तो हम डिजिटल प्रमाण पत्र बना रहे हैं अगर हमारे रिकॉर्ड में जानकारी जानकारी नहीं मिलती है तो वह जाति प्रमाण पत्र फर्जी हो सकते हैं उन सभी को दोबारा विस्तृत दस्तावेज जमा करने होंगे
आर एस बघेल, एसडीएम पिपरिया

हमारे पास अगर पूर्व में जारी जाति प्रमाण पत्र पर अंकित प्रकरण के अनुसार रिकॉर्ड मिलते हैं तो हम डिजिटल प्रमाण पत्र बना रहे हैं अगर हमारे रिकॉर्ड में जानकारी जानकारी नहीं मिलती है तो वह जाति प्रमाण पत्र फर्जी हो सकते हैं उन सभी को दोबारा विस्तृत दस्तावेज जमा करने होंगे
आर एस बघेल, एसडीएम पिपरिया

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