डब्ल्यूएचओ के फरमान फिर भी हर माह एक लाख एंटीबायोटिक इंजेक्शन और गोलियों की खपत

दो साल में दोगुनी से ज्यादा हो गई खपत

By: sandeep nayak

Published: 26 Oct 2018, 03:06 PM IST

होशंगाबाद। मरीजों को कम से कम एंटीबायोटिक्स इंजेक्शन और गोलियां दी जाएं। ताकि उनके शरीर पर इनके उपयोग के दुष्परिणाम न हो। अति आवश्यक होने पर ही उपयोग किया जाए। डब्ल्यूएचओ के इस फरमान के बाद भी जिला अस्पताल में एंटीबायोटिक्स इंजेक्शन और गोलियों की खपत कम नहीं हुई है। हर माह लगभग एक लाख इंजेक्शन और गोलियां मरीजों को दी जा रही हैं। यह तब हो रहा है जब जिला अस्पताल में एंटीबायोटिक्स दवाओं के अधिक उपयोग को रोकने के लिए टीम तक गठित है। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि हर माह 19 हजार मरीजों पर 50 हजार गोलियां और इतने ही इंजेक्शन का उपयोग किया जा रहा है। मतलब अस्पताल में 1667 गोलियां और 1667 इंजेक्शन का उपयोग हर माह किया जा रहा है। यह खपत पिछले दो साल में दो गुनी बढ़ गई है।

इसलिए कम उपयोग करने के दिए थे आदेश
डब्ल्यूएचओ के आदेश में कहा गया था कि बार-बार एंटीबायोटिक्स दवा के इस्तेमाल से शरीर में इनके प्रति रेसिस्टेंस बढऩे लगता है। जिस वजह से कुछ समय बाद मौसमी बीमारियों में ली जाने वाली एंटीबायोटिक्स दवाएं न के बराबर असर करती हैं। सर्दी, बुखार व जुकाम में बिना डॉक्टर सलाह के एंटीबायोटिक्स दवा लेने की आदत सेहत के लिए कई दिक्कतें पैदा कर सकती है। बार-बार एंटीबायोटिक्स लेने से पेट में मौजूद खराब बैक्टीरिया के साथ अच्छे बैक्टीरिया भी मर जाते हैं। जिससे शरीर का बैक्टीरियल सिस्टम बिगड़ जाता है। ऐसे में टाइप-टू डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है। इनके अलावा भी एंटीबायोटिक्स दवा के कई साइड इफैक्ट हैं।
साल 2016 में कम थी खपत
एंटिबायोटिक दवाओं की अभी के मुकाबले माह में करीब 17 हजार ही टेबलेट्स लग रही थीं। वहीं इंजेक्शन की खपत भी करीब 16 से 18 हजार के बीच ही था। लेकिन पिछले दो सालों में इन दवाओं का उपयोग दो गुने से अधिक हो गया है।

इन डॉक्टरों को सौंपा मॉनिटरिंग का जिम्मा
जिला अस्पताल में एंटिबायोटिक्स दवाओं की मॉनिटरिंग समिति में डॉ.रविंद्र गंगराडे, डॉ.जेपीएन चतुर्वेदी, डॉ.अजय सक्सेना को सौंपा गया था। लेकिन उसके बाद से एेसी दवाओं की रोक थाम के लिए कोई खास नहीं किया जा सका।
ऑडिट नहीं किया
&हमने अभी तक एंटीबायोटिक के उपयोग को लेकर कोई ऑडिट नहीं किया है। हालांकि इसका अधिक उपयोग नहीं होना चाहिए। पूर्व में गठित हुए समिति को एक्शन में लाएंगे।
डॉ. सुधीर डेहरिया, सीएस

sandeep nayak Desk/Reporting
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