जेसीबी से करा रहे मनरेगा के काम, घर में बैठे हुए हैं मजदूर

रानीपुर रेंज की शाजपुर बीट में नियमों की उड़ रही धज्जियां

By: pradeep sahu

Published: 09 Dec 2017, 09:16 PM IST

बैतूल. मनरेगा के तहत सौ दिन का रोजगार दिलाने का दावा जिले में किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकारियों द्वारा मजदूरों की जगह मशीनों से काम लिया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला वनवृत बैतूल परिक्षेत्र में देखने में आया है। जहां मजदूर घर पर बैठे हैं और विभाग द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मशीनों से काम करवाया जा रहा है। बताया गया कि वन विभाग द्वारा बीट में चैक डेम, वनग्रामों में सड़कों के निर्माण और नाली निर्माण के कार्य करोड़ों रुपए खर्च कर किए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद अब बड़े अधिकारी जहां इस काम को नियम विरूद्ध बता रहे हैं। वहीं मैदानी स्तर के अधिकारियों की बोलती बंद हो गई है।

करोड़ों की लागत से हो रहे काम
उत्तर वन मंडल के रानीपुर परिक्षेत्र के वनग्रामों में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए सड़क, नाली और जंगलों में चैक डैम बनाने का काम किया जा रहा है। मौके पर चलती जेसीबी और अन्य मशीने आसानी से देखी जा सकती है। वन अधिकारी जेसीबी से काम ना कराने की जानकारी को गलत तो बता रहे हैं, लेकिन जेसीबी से की गई खुदाई के निशान जहां स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं। वही मौके पर जेसीबी से काम होता हुआ भी स्पष्ट नजर आ रहा है। मामला सामने आने के बाद जब परिक्षेत्र अधिकारी से इस संबंध में चर्चा की गई तो स्पष्टिकरण देने के बजाए उनसे सवालों का जवाब तक देना नहीं हो पा रहा था।

डिप्टी रेंजर का कहना: नहीं मिल रहे मजदूर
नियमों को ताक पर रखकर जंगलों में हो रहे इस निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही जैसे ही मीडिया के सामने आई, मौके पर हड़कंप मच गया । रानीपुर कार्यालय में बैठे हुए परिक्षेत्र अधिकारी जहां यह बता रहे हैं कि कोई भी निर्माण कार्य जेसीबी से नहीं कराया जा रहा । वही दूसरी तरफ मौके पर मौजूद काम की मॉनिटरिंग कर रहे डिप्टी रेंजर ने स्पष्ट कर दिया कि मजदूरों के ना मिलने से जेसीबी से काम कराना मजबूरी बन गया है। सवाल यह उठता है कि एक ही परिक्षेत्र में कार्यरत दोनों अधिकारी जब अलग-अलग जवाब दे रहे हैं तो इनमें से कौन सही है और कौन गलत ये तो अधिकारी यदि मामले की सुक्ष्मता से जांच कराए तो सामने आ सकता है।

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