मंत्रिमंडल ने लिए नर्सिंग कॉलेज की फीस बढ़ाने समेत चार महत्वपूर्ण निर्णय

दो सरकारी मेडिकल कॉलेजों का नाम बदला, तरक्की के लिए अनुभव अवधि घटाई

By: Bhanu Pratap

Updated: 23 Sep 2020, 06:40 PM IST

चंडीगढ़। सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल शिक्षा और बुनियादी सहूलतें और मज़बूत करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल ने बुधवार को अकादमिक सैशन 2020 -21 से विभिन्न नर्सिंग कोर्सेज के लिए शुल्क में संशोधन को मंजूरी दे दी है। फीस में विस्तार सिर्फ 2020 -21 से नये सैशन में दाखि़ल होने वाले नये विद्यार्थियों पर लागू होगा। पहले ही दाखि़ल विद्यार्थी पूरे कोर्स के लिए पुरानी फीस का भुगतान करेंगे।
जी.एन.एम. कोर्स बंद हो सकता है

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि राज्य के सरकारी /प्राईवेट नर्सिंग कॉलेजों में ए.एन.एम. नर्सिंग कोर्स और प्राइवेट कालेजों में बी.एस.सी. नर्सिंग (बेसिक) और बी.एस.सी. नर्सिंग (पोस्ट बेसिक) सम्बन्धी संशोधन प्रस्तावित किया गया है। प्रवक्ता ने आगे बताया कि कमेटी ने 23 मार्च, 2020 को विस्तार से विचार-विमर्श करने के बाद और अन्य राज्यों में फ़ीसों और समूचे खर्चों में वृद्धि को ध्यान में रखते सर्वसम्मति से सिफ़ारिश की है कि सरकारी अदारों के लिए फीस प्राइवेट अदारों की अपेक्षा कम निर्धारित की जाये। जी.एन.एम. कोर्स की फीस में संशोधन नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि भारतीय नर्सिंग कौंसिल की तरफ से इस कोर्स को 2021 से बंद किये जाने की उम्मीद है।

ये है फीस का नया ढांचा
ए.एन.एम. कोर्स की फीस सरकारी अदारों के लिए प्रति साल 5000 रुपए से बढ़ा कर 7000 रुपए और प्राइवेट अदारों के लिए प्रति साल 14375 रुपए से बढ़ा कर 18000 रुपए करने को प्रस्तावित किया गया। बी.एस.सी. नर्सिंग (बेसिक) और बी.एस.सी. नर्सिंग (पोस्ट बेसिक) कोर्स की फीस में कोई विस्तार नहीं किया जायेगा, जोकि सरकारी अदारों में 40000 रुपए प्रति साल है। हालाँकि, प्राइवेट अदारों में इसको 40250 रुपए प्रति साल से बढ़ा कर 50000 रुपए प्रति साल करने का प्रस्ताव दिया गया है। कमेटी ने सरकारी अदारों में एम.एस.सी. (नर्सिंग) कोर्स की फीस में कोई विस्तार न करने का प्रस्ताव दिया था। सरकारी अदारों में इस कोर्स की फीस 1,00,000 रुपए प्रति साल और प्राईवेट अदारों में 1,75,000 रुपए प्रति साल है। कमेटी की सिफारिशों के अनुसार मंत्रिमंडल ने 5 साल के लिए सरकारी और प्राइवेट अदारों में आगामी बैंच के लिए फ़ीसों में हर साल 5 प्रतिशत का विस्तार करने की मंजूरी दे दी है और 5 साल बाद समीक्षा की जायेगी।

मैट्रन पद पर तरक्की के लिए अनुभव अवधि घटाई

मंत्रिमंडल ने मैट्रन के पद के लिए तरक्की देने सम्बन्धी कम से कम तजुर्बे को पाँच साल से घटा कर तीन साल करने के लिए पंजाब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तकनीकी (ग्रुप बी) सर्विस रूल्स, 2018 में संशोधन को मंजूरी दे दी है।

राज्य पुलिस शिकायत अथॉरिटी के काम-काज संबंधी नियमों को मंजूरी

इस साल की शुरुआत में स्थापित की गई पंजाब स्टेट पुलिस शिकायत अथॉरिटी-2020 के काम-काज के संचालन नियमों को मंजूरी दे दी है जिससे पुलिस के एस.एस.पी./डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस और इनसे अतिरिक्त रैंकों के पुलिस अधिकारियों के खि़लाफ़ गंभीर किस्म के दोषों की जांच की जा सके। यह जि़क्रयोग्य है कि संशोधित हुए पंजाब पुलिस ऐक्ट-2007 की धारा 54-एफ के अंतर्गत यह निर्धारित किया गया है कि पंजाब पुलिस शिकायत अथॉरिटी राज्य सरकार की मंजूरी से प्रांतीय अथॉरिटी और डिवीजऩल पुलिस शिकायत अथॉरिटी के काम-काज के लिए नियम बनाएगी। गौरतलब है कि प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार और अन्यों में 22 सितम्बर, 2006 के फ़ैसले के संदर्भ में भारतीय सुप्रीम कोर्ट के हुक्मों के अनुपालन में 5 फरवरी, 2008 को पंजाब पुलिस ऐक्ट-2007 नोटीफाई किया गया। 23 जनवरी, 2020 में कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार ने संशोधित धारा के अंतर्गत राज्य पुलिस शिकायत अथॉरिटी का गठन करके डॉ. एन.एस. कलसी (सेवामुक्त आई.ए.एस.) को चेयरपर्सन नियुक्त किया।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों का नाम बदलने की मंजूरी
कपूरथला के कॉलेज का नाम श्री गुरु नानक देव स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और होशियारपुर के कॉलेज का नाम शहीद ऊधम सिंह स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज होगा यह जि़क्रयोग्य है कि मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान विभाग का मानना है कि नये स्थापित होने वाले मेडिकल साइंसेज इंस्टीट्यूटस के बेहतर प्रबंधन के लिए इनको सोसायटी के अधीन स्थापित किया जाना चाहिए क्योंकि राज्य सरकार को पेश राजस्व संकट के कारण पटियाला और अमृतसर में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेजों को चलाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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