लॉकडाउन बना मुसीबत : मां के इलाज के लिए 12वीं कक्षा में पढ़ने वाला लड़का कर रहा शव उठाने का काम

  • Lockdown Impact : अस्पताल में कोरोना मरीजों का शव उठाने और साफ-सफाई करके 12वीं कक्षा का छात्र उठा रहा है घर का खर्चा
  • लॉकडाउन के चलते बड़े भाई की चली गई नौकरी तो मजबूरी में किया ये काम

By: Soma Roy

Published: 18 Jun 2020, 09:29 AM IST

नई दिल्ली। कहते हैं जब मजबूरी आती है तब कोई काम छोटा या बड़ा नहीं रहता। ऐसा ही कुछ सीलमपुर निवासी चांद मोहम्मद (20) के साथ भी हुआ। लॉकडाउन (Lockdown) के चलते बड़े भाई की नौकरी चली गई। तो वहीं मां भी बीमार है। ऐसे में घर का खर्च उठाने की खातिर 12वीं कक्षा में पढ़ने (12th Class Student) वाल चांद मोहम्मद अस्पताल में शव उठाने (Corona Patients Corpses) का काम करने लगा। इससे मिले रुपयों से वह मां के लिए दवाईयां लाता है। उसकी इस कोशिश को देख उसकी मां की आंखें भर आती है।

घरवालों को मिला सहारा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चांद मोहम्मद ने बताया कि उसके बड़े भाई पहले किसी दुकान पर काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन में उनकी नौकरी छूट गई। ऐसे में परिवार का गुजारा मुश्किल हो गया। क्योंकि घर में उसकी तीन बहनें और माता-पिता है। साथ ही एक भाई भी। ऐसे में घर का खर्च उठाने के लिए उसने एलएनजेपी अस्पताल में सफाई करने के काम में लग गया। यहां अब वह दोपहर 12 बजे से रात आठ बजे तक कोरोना से मरने वालों के शव उठाता है।

एक वक्त बन पाता था खाना
लॉकडाउन के चलते रोजगार छिन जाने से चांद मोहम्मद के घर खाने की भी दिक्कत हो गई थी। मुश्किल से घर में एक वक्त का खाना बन पाता था। ऐसे में चांद को तुरंत किसी काम की जरूरत थी। इसी वजह से उसने शवों को उठाने का काम किया। उसका कहना है कि संक्रमित मरीजों के बीच रहने और शव उठाने के चलते उसे कोरोना का खतरा है, लेकिन घरवालों के लिए वह कुछ भी कर सकता है। हालांकि उसने कहा कि शव उठाने और उसे मुर्दाघर तक पहुंचाने में वह पीपीई किट पहनता है।

स्कूल की फीस के लिए जुटा रहा है रुपए
चांद ने बताया कि उसकी तीन बहने स्कूल में पढ़ती हैं। साथ ही वह खुद भी अपनी 12 वीं में है। मगर रुपए न होने की वजह से वह पिछली बार फीस नहीं दे पाया था। मगर इस काम से उसे ठीक-ठीक रुपए मिल जाते हैं। जिससे उसके हौंसलों को उड़ान मिली है। उसका कहना है कि उसे खुद पर पूरा भरोसा है, इसलिए वह हर काम को पूरे मन से करता है।

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