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झारखंड सरकार पर है 85 हजार करोड़ का कर्ज/गरीबी दूर करना भी एक बड़ी चुनौती, कैसे निपटेगी सोरेन सरकार?

बीजेपी महज 25 सीटें जीतने में कामयाब रही
हेमंत सोरेन होंगे राज्य के अगले सीएम

नई दिल्लीDec 24, 2019 / 11:43 am

Prakash Chand Joshi

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नई दिल्ली: देशभर में चल रही मोदी लहर के बीच झारखंड ( Jharkhand ) में बीजेपी को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। राज्य में गठबंधन की जीत हुई और इसके साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता हेमंत सोरेन के सीएम बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हेमंत सोरेन के लिए सीएम की कुर्सी कांटों भरी हो सकती है क्योंकि उनके सामने चुनौतियां का एक विशाल पहाड़ खड़ा है।

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85 हजार करोड़ का कर्ज

झारखंड राज्य और होने वाले सीएम हेमंत सोरेन ( Hemant Soren ) के लिए सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि राज्य सरकार पर मौजूदा समय में 85 हजार 234 करोड़ रुपये का कर्ज है। साल 2014 में जब रघुवर दास सीएम बने थे, तब सरकार पर 37 हजार 593 करोड़ रुपये का कर्ज था। लेकिन इसके बाद ये कर्ज बढ़ता चला गया। एक अंकड़े के मुताबिक, जितना कर्ज पिछले 14 सालों में बनी सरकारों ने लिया, उससे कहीं ज्यादा रघुवर सरकार ने लिया। वहीं अब इस कर्ज का सामना सोरेन सरकार को भी करना होगा। वहीं किसानों पर भी 6 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज है। इस चुनौती से भी गठबंधन सरकार को जूझना पड़ेगा।

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गरीबी से निपटना

वहीं झारखंड जब साल 2000 में बिहार से अलग हुआ, तब से राज्य पर गरीब राज्य का टैग लगा हुआ है। यहां 36.96 प्रतिशत से ज्यादा आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करती है। साल 2017 में सिमडेगा जिले में 11 साल की संतोषी नामक बच्ची भात-भात कहते मर गई थी। भूख से तड़पकर हुई मौत की इस घटना पर हंगामा मच गया था। आंकड़ों की बात करें तो झारखंड को हर साल करीब 50 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न चाहिए मगर यहां बेहतर से बेहतर स्थिति में भी 40 लाख मीट्रिक टन ही उत्पादन हो पाता है। इस 10 लाख मीट्रिक टन के अंतर को भर पाना हेमंत सोरेन के लिए चुनौती है। वहीं झारखंड देश के सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाले राज्यों में भी शुमार है। सैंपल सर्वे ऑफिस की इस साल अप्रैल में आई रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड देश के उन 11 राज्यों में शामिल है, जहां बेरोजगार की दर सर्वाधिक है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वाधिक बेरोजगारी दर के मामले में देश में झारखंड पांचवें नंबर पर है। एनएसएसओ के आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में 2011-12 में 2.5 प्रतिशत बेरोजगारी की दर रही, जो 2017-18 में बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई। इस रिपोर्ट में केरला में सर्वाधिक 11.4 प्रतिशत बेरोजगारी की दर बताई गई थी।

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