इस सरकारी टीचर के पास है ‘जादुई पेंसिल’, जिसकी मदद से बदल दी स्‍कूल और बच्‍चों की किस्‍मत

‘जादुई पेंसिल’ से बदली स्‍कूल और बच्‍चों की किस्‍मत

By: Vivhav Shukla

Published: 27 Nov 2019, 08:29 PM IST

नई दिल्ली। अगर एक स्कूल टीचर चाहे तो क्या नहीं कर सकता। यही वजह है कि समाज में गुरु को सबसे ऊंचा स्थान मिला है। टीचर केवल बच्चों को शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि समाज को भी दिशा देकर आगे बढ़ना सिखाता है। ऐसे ही एक गुरू है बी. कोटरेश( B Kotresh )। 38 साल के बी. कोटरेश कर्नाटक के रायचूर में सिंधनुर तालुका के बेलागुर्की गाँव के रहने वाले हैं। कोटरेश ने जब बेलागुर्की सरकारी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया था तो स्कूल की हालत एकदम ही खस्ता थी और बच्चे स्कूल नहीं आना चाहते थे । लेकिन इन्होंने अपनी मेहनत से स्कूल की हालत बदल दी।

कोटरेश बतातें हैं “एक वक़्त था जब बच्चे स्कूल नहीं आना चाहते थे और अब वे यहाँ से जाना नहीं चाहते और ये सब मुमकिन हो सका है ‘पेंसिल’ की बदौलत। ‘पेंसिल,’(Pencil) उनके स्कूल की मैगज़ीन है। जिसे वे खुद छपवाते हैं। कोटरेश ने साल 2013 में स्कूल मैगज़ीन ‘पेंसिल’ शुरू की थी। इसे शुरू करने की मुख्य वजह बच्चों को किसी क्रिएटिव चीज़ में शामिल करना और फिर उन्हें इसकी ज़िम्मेदारी का एहसास कराना था।वह हर महीने कम से कम मैगज़ीन के 500 कॉपी छपवाते हैं, जिन्हें गांव के लोगों में बांटा जाता है। इसे छपवाने में हृर महीने लगभग 4,000 रुपये लगते हैं जिसे कोटरेश अपनी जेब से देते हैं।

b_kotresh_how_a_village_got_its_groove_.jpg

कोटरेश बताते हैं कि पेंसिल के एक सेक्शन को खास तौर पर गाँव के लोगों के लिए डिजाईन किया गया है ताकि उन्हें भी पता चले कि स्कूल में क्या-क्या होता है? गांव के लोग बेसब्री से इस मैगज़ीन का इंतज़ार करते हैं। इसके साथ ही ‘पेंसिल’ जरिए पंचायत के लोग स्‍कूल की समस्‍याओं के बारे में भी पढ़ते हैं। उन्हें एहसास होता है कि उन्हें क्‍या काम करना चाहिए। आगे उन्होंने बताया की जब मैने इसे पहली बार छपवाया था तो बच्चे बहुत उत्साहित थे। मुझे नहीं याद कि किसी और चीज़ में मैंने उनकी कभी इतनी रूचि देखी है। मैगज़ीन के लिए काम करने पर उन्हें गर्व महसूस होता है।”

बता दें कोटरेश ने बीते 6 साल में स्‍कूल का कायाकल्‍प कर दिया है। आज स्‍कूल में बढ़‍िया इंफ्रास्ट्रक्चर, शौचालय, पानी पीने की अच्छी व्यवस्था, स्पोर्ट्स रूम, लाइब्रेरी और चार नए क्लासरूम हैं। बी. कोटरेश इन सारी सफलता का श्रेय बच्‍चों को और अपने जादुई पेंसिल को देते हैं।

Vivhav Shukla
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned