खूबसूरत वादियों के बीच मनमोहक पिंजौर गार्डेन की करें सैर

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इतिहास

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इतिहास 
महाभारत काल में इसे पंचपुरा के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने बारह साल के वनवास के बाद तेरहवां वर्ष यहीं गुजारा तथा 365 बावडिय़ों का निर्माण करवाया था, जिनमें से कई अब भी मौजूद हैं। यहां स्थित शिवमंदिर के साथ की बावड़ी को सात पवित्र नदियों गंगा, से भी पवित्र समझा जाता है, कहा जाता है कि इस बावड़ी को अर्जुन ने द्रौपदी की प्यास बुझाने के लिए तीर मारकर बनाया था। सिखों के पहले गुरु श्रीगुरुनानक देव जी भी पिंजौर आए थे। उद्यान में प्रवेश करने के लिए चार दरवाजे बने हैं जिनमें तीन बंद रहते हैं। 

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