प्लास्टिक की नाव ने प्रशांत महासागर से निकाला 103 टन का कचरा, बन गया World record

Ocean Voyages Institute ने कोरोना (Coronavirus) महामारी के दौर में भी महासागर को साफ करने की काम बंद नहीं किया था। इस मिशन के तहत संस्थान मे अपनी एक नाव को प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में भेजा था। 48 दिनों तक महासागर में रहने के बाद, ये नाव कचरा इकट्ठा करते हुए होनोलुलू बंदरगाह पर पहुंच गई। ये नाव अपने साथ 2,06,000 पाउंड के मछली पकड़ने के जाल और प्लास्टिक वापस ले आई।

 

By: Vivhav Shukla

Published: 30 Jun 2020, 05:56 PM IST

नई दिल्ली। एक प्लास्टिक की नाव ने कुछ ऐसा कर दिखाय है जो कि बड़े बडे़ जहाजों भी मुश्किल से कर पाते हैं। दरअसल, Ocean Voyages Institute की नाव ने प्रशांत महासागर से 103 टन कचरे कचरा निकाल कर नया विश्व रिकार्ड बना दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार Ocean Voyages Institute ने कोरोना महामारी के दौर में भी महासागर को साफ करने की काम बंद नहीं किया था। इस मिशन के तहत संस्थान मे अपनी एक नाव को प्रशांत महासागर में भेजा था। 48 दिनों तक महासागर में रहने के बाद, ये नाव कचरा इकट्ठा करते हुए होनोलुलू बंदरगाह (port of Honolulu in Hawaii) पर पहुंच गई। ये नाव अपने साथ 2,06,000 पाउंड के मछली पकड़ने के जाल और उपभोक्ता प्लास्टिक वापस ले आई।

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इससे पहले साल 2019 में इसी नाव ने 25-दिवसीय क्लीन-अप यात्रा से एक रिकॉर्ड दर्ज किया था। लेकिन इस साल, कचरा का संग्रह दोगुना हो गया और एक सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।Ocean Voyages Institute के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक मैरी क्रॉली ( Mary Crowle) ने बताया कि हमें अपने परिश्रमी दल पर गर्व है। हमने 100 टन विषैले उपभोक्ता प्लास्टिक और मछली पकड़ने के जाल के जाल को महासागर से बाहर कर दिया है। हम अपने महासागर के स्वास्थ्य को बहाल करने में मदद करना जारी रख रहे हैं।

बता दें अब तक सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा प्रशांत महासागर में पाया गया है। अनुमान है कि उत्तरी प्रशांत में मछलियां हर साल 12,000 से 24,000 टन प्लास्टिक निगलती हैं, जो उनकी आंतों में घाव और फिर मौत का कारण बन सकती है। इससे इन जीव.जन्तुओं में खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है।

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एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 80 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा समुद्रों में पहुंच रहा है। प्रत्येक मिनट एक ट्रक प्लास्टिक कचरा समुद्र में दाखिल हो रहा है। धरती की सतह पर लोगों द्वारा फेंका गया प्लास्टिक कचरा बारिश और शहरी नालों द्वारा नदियों में पहुंचता है, जो आखिरकार समुद्र में मिल जाता है।

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