मौत के 40 साल बाद पेड़ बनकर आया शख्स, सच्चाई जान शोधकर्ता भी हैरान

इस दुनिया में ऐसी कोई भी चीज नहीं जो हमेशा वैसी की वैसी रहेगी। इमारत हो या इंसान एक दिन तो खत्म होगी ही। कहानियों और फिल्मों में इंसान मरने के बाद दोबारा जन्म लेते है। ऐसा कहा जाता है कि आत्म तो अजर और अमर है। मरता तो इंसान का शरीर। लेकिन आज आपको एक ऐसी कहानी के बारे में बताने जा रहे है कि जिसके बारे में जानकर आप चकित रह जाएंगे।

By: Shaitan Prajapat

Published: 22 Oct 2020, 10:08 PM IST

इस दुनिया में ऐसी कोई भी चीज नहीं जो हमेशा वैसी की वैसी रहेगी। इमारत हो या इंसान एक दिन तो खत्म होगी ही। कहानियों और फिल्मों में इंसान मरने के बाद दोबारा जन्म लेते है। ऐसा कहा जाता है कि आत्म तो अजर और अमर है। मरता तो इंसान का शरीर। लेकिन आज आपको एक ऐसी कहानी के बारे में बताने जा रहे है कि जिसके बारे में जानकर आप चकित रह जाएंगे। एक रिपोर्ट के अनुसार एक शख्स 40 साल पहने मर गया था इतने साल बाद वह पेड़ बनकर दुनिया के सामने आया है। हालांकि इस पर कई लोग यकीन नहीं कर रहे है और वे सवाल कर रहे है।

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शोधकर्ता भी पेड़ को लेकर हैरान
खबरों की माने तो 1974 में अहमेट हर्ग्यूनर नाम के एक शख्स को ग्रीक और टर्किश संघर्ष के बीच मार दिया गया था। कई सालों तक उसका शव नहीं मिला। कई दशक बाद वह एक पेड़ उग आया। बताया जा रहा है कि साइप्रस में हर्ग्यूनर और एक अन्‍य शख्‍स को संघर्ष के दौरान गुफा के अंदर डाइनामाइट से उड़ा दिया गया था। उस समय एक छेद हो गया था। छेद से सूरज की रोशनी उस अंधेरी गुफा तक लगी और हर्ग्यूनर के पेट में पड़े अंजीर के बीज को फलने-फूलने लगा। धीरे-धीरे पेट में मौजूद बीज ने पौधे का रूप ले लिया। वो एक बड़ा अंजीर का पेड़ बन गया। उस पेड़ पर साल 2011 में सबसे पहले एक शोधकर्ता का ध्‍यान गया। यह शोधकर्ता भी इस बात से हैरान था कि गुफा के अंदर कैसे पेड़ निकल सकता है। ऐसे पहाड़ी इलाके में जहां आमतौर पर अंजीर के पेड़ पाए ही नहीं जाते हैं।

 

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मरने से पहले खाई होगी अंजीर
रिसर्च में पता चला कि यहां एक लाश काफी लंबे समय से दबी हुई थी। पुलिस ने जब पेड़ के आसपास खुदाई की तो इस स्थान से तीन शव बरामद हुए। बताया जा रहा है कि मरने से पहले हर्ग्यूनर ने अंजीर खाई होगी। हर्ग्यूनर की बहन मुनूर हर्ग्यूनर ने बताया कि हम जिस गांव में रहते थे, वहां करीब चार हजार लोग थे। उनमें आधी आबादी ग्रीक और आधी आबादी तुर्की के लोगों की थी। 1974 में तनाव शुरू हो गया। मेरा भाई टर्किश रेसिस्‍टेंट ऑर्गनाइजेशन में शामिल हो गया था। 10 जून को ग्रीक मेरे भाई को उठा ले गए। मुनूर का कहना है कि उन्‍होंने अपने भाई को बहुत खोजा लेकिन वो नहीं मिला।

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