दिल्ली: ब्रेन डेड मुस्लिम महिला ने बचाई चार लोगों की जान, खुद मौत से हार गई जंग

  • 41 वर्षीय महिला रफत परवीन 4 लोगों को जीवन दान दे गई
  • दिल (हर्ट), किडनी और लीवर को कर दिया दान

By: Pratibha Tripathi

Published: 29 Dec 2020, 11:24 PM IST

नई दिल्ली- एक महिला जो जीवन और मौत के बीच हुई जंग में खुद तो हार गई लेकिन 4 लोगों को जीवन दान दे गई। दरअसल यह दिल को छूने वाला मामला है उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का, जहां एक 41 वर्षीय महिला रफत परवीन जिनका पूरा देश सम्मान कर रहा है, पिछले हफ्ते उन्हें ब्रेन हेम्रेज की शिकायत के बाद वैशाली के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस अस्पताल में डॉक्टरों की पूरी टीम ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों को असफलता हाथ लगी। अंत में डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

एक खबर के मुताबिक महिला के मस्तिष्क में ब्लड क्लॉट् हो गया था जिसकी वजह से उन्हें नहीं बचाया जा सका। डॉक्टरों ने मृतका रफत परवीन के परिजनों से बात कर अंगदान के लिए तैयार किया। परिजनों की सहमति से उनके दिल (हर्ट), किडनी और लीवर को ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया जिसे चार मरीजों को प्रत्यारोपित कर उन्हें नई ज़िंदगी दी गई।

मैक्स अस्पताल के आपरेशनल हेड डॉ गौरव अग्रवाल की माने तो परिवार की अनुमति के बाद हॉस्पिटल ने आनन-फानन में राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन को खबर देकर ज़रूरतमंदों को देने के लिए तैयार किया।

सभी की ओर से पूर्ण सहमति मिलने के बाद डॉक्टर्स की अलग-अलग टीमों ने बिना समय गंवाए रात के समय ही ऑपरेशन कर ब्रेन डेड महिला के अंगों को निकाल कर दूसरे मरीजों मे प्रत्यारोपण के लिए अलग-अलग अस्पताल भेजने का इंतज़ाम किया। इस कार्य के लिए गाजियाबाद और दिल्ली की पुलिय ने सक्रियता दिखाते हुए ग्रीन कॉरीडोर बनाने में भरपूर सहयोग दिया। हर्ट को एम्बुलेंस के द्वारा मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, साकेत में स्थानांतरित किया गया। जहां मरीज की सफल प्रत्यारोपण सर्जरी की गई। इसके अलावा दो जरूरतमंद मरीजों के शरीर में किडनी और लीवर का प्रत्यारोपित किया गया।

अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि दूसरी किडनी को एंबुलेंस के द्वारा महज 45 मिनट में आर्टेमिस अस्पताल, गुरुग्राम पहुंचाया गया। शुक्रवार को जब ग्रीन कॉरीडोर बना कर महिला के अंग भेजे गए जो 18 मिनट में 23.8 किमी की दूरी तक पहुंचाया गया।

अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि “हर्ट को उत्तराखंड के 56 वर्षीय एक मरीज में प्रत्यारोपित किया गया है। जिन्हें प्रत्यारोपि किया गया उनके हर्ट ने काम करना पूरी तरह से बंद कर दिया था।

Pratibha Tripathi
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