कोरोना वायरस : लॉकडाउन बना गरीब बच्चों के लिए मुसीबत, भूखे पेट सोने को मजबूर

  • Lockdown Impact : सरकारी आदेश के बावजूद कई जगह नहीं मिल रहा है मिड डे मील
  • श्रमिकों के बच्चों को हो रही है सबसे ज्यादा दिक्कत

By: Soma Roy

Published: 22 Mar 2020, 12:01 PM IST

नई दिल्ली। कोरोन वायरस (Coronavirus) के खिलाफ जंग जीतने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में लॉकडाउन (Lockdown) किया गया है। लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है, लेकिन यही पहल गरीब बच्चों के लिए मुसीबत का सबब बन रही है। दरअसल कई इलाकों में मिड डे मील ()Mid Day Meal न मिल पाने की वजह से मजदूरों के बच्चे भूखे पेट सोने को मजबूर हैं।

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एक एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक सिलिगुड़ी के चाय बागानों में काम करने वाले बच्चों को दो जून की रोटी तक नसीब नहीं हो रही है। क्योंकि स्कूल-कॉलेज और आंगनबाड़ी के बंद होने से मिड डे मील नहीं दिया जा पा रहा है। जबकि सरकारी आदेशों के मुताबिक शिक्षक संस्थानों (institutions) के बंद रहने के बावजूद मिड डे मील की व्यवस्था वैसे ही जारी रहेगी। मिड डे मील न मिल पाने की समस्या यूपी के कई इलाकों में भी देखने को मिली। बलिया, लखीमपुर खीरी आदि जगहों पर अस्थायी रूप से ये व्यवस्था बंद है। इसकी वजह से बच्चों को बिना खाने के ही गुजारा करना पड़ रहा है।

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दुकानें एवं अन्य सभी चीजें बंद होने की वजह से श्रमिक बाहर से भी कुछ ले नहीं पा रहे हैं। उनका कहना है कि रोजाना के खर्चे के लिए उन्हें दिनभर में जो मजदूरी मिलती थी वो घर चलाने के लिए भी काफी नहीं होता था। ऐसे में पूरे इलाके के बंद हो जाने से उनका काम भी बंद चल रहा है। ऐसे हालात में बच्चों को खाना खिलाना ()starvation और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है। पहले मिड डे मील का सहारा था, लेकिन कोरोना के कहर की वजह से उन्हें परेशानी हो रही है। मालूम हो कि सरकार ने मिड डे मील की व्यवस्था जरूरतमंद बच्चों को पौष्टिक भोजन मुहैया कराने के लिए की गई है।

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