आज के दिन भूल कर भी ना करें यह काम, नहीं तो होगा कुछ ऐसा जिससे पूरी जिंदगी भर पछताना पड़ेगा

चतुर्थी में एक बात का ध्यान तमाम व्यस्तताओं के बीच में भी रखें और वह है इस दिन चांद का दर्शन न करें।

September, 1311:19 AM

हॉट ऑन वेब

नई दिल्ली। आज पूरे देश भर में गणेश चतुर्थी के त्यौहार को धूमधाम से मनाया जा रहा है। पिछले कई दिनों से लोग इसके लिए जमकर तैयारियां कर रहे हैं। जैसा कि आप जानते ही हैं कि भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दर्शी तक इस उत्सव को मनाया जाता है। दस दिनों तक मनाए जाने वाले इस त्यौहार में भक्त गणपति बप्पा की आराधना करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की दुआ मांगते हैं।

 

गणेश चतुर्थी

इंसान के लिए हमेशा हर छोटी-मोटी चीज पर ध्यान देना संभव नहीं होता क्योंकि दिन भर की व्यवस्तता, निजी काम इत्यादि से वह घिरा रहता है। ऐसे में भूल-चूक होना स्वाभाविक है, लेकिन चतुर्थी में एक बात का ध्यान तमाम व्यस्तताओं के बीच में भी रखें और वह है इस दिन चांद का दर्शन न करें।

जी हां, चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन करना वर्जित है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में कलंक लग सकता है। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण जब इस कलंक से नहीं बच सकें तो इंसान क्या चीज। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों चतुर्थी में चांद को देखने की मनाही है? क्या कारण है इसके पीछे?

 

गणेश चतुर्थी

पैराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार चतुर्थी के दिन ब्रह्मा जी ने गणेश जी का व्रत किया था। उनके व्रत से संतुष्ट होकर गणेशजी प्रकट हुए और ब्रह्मा जी से वर मांगने को कहा। इस पर ब्रह्मा जी ने कहा कि, मुझे सृष्टि की रचना करने का मोह न हो। गणेश जी ने इसका वरदान दिया और वहां से प्रस्थान करने लगे। उसी दौरान गणेश जी के सूंड वाले मुख को देखकर चंद्रमा कों हंसी आ गई।

गणेश चतुर्थी

इस पर गणेश जी क्रोधित होकर चंद्रमा से कहा कि, तुम्हें अपनी खूबसूरती पर बहुत गुरुर है। मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि आज से कोई तुम्हारा दर्शन नहीं करेगा। जो ऐसा करेगा उसे जीवन में झूठे आरोपों का सामना करना होगा जिससे वह प्रताड़ित होगा।

 

गणेश चतुर्थी

गणेश जी के इस श्राप के डर से चंद्रमा मानसरोवर की कुमुदिनियों में जा छिपा। चांद की रोशनी के बिना जगत में प्राणियों को कष्ट होने लगा। समस्या को देखते हुए ब्रह्मा जी ने समस्त देवताओं को गणेश जी का व्रत करने का आदेश दिया। इससे गणेश जी प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान दिया कि, श्राप पूरी तरह खत्म नहीं होगा। यह आने वाली पीढ़ियों को इस बात का एहसास दिलाएगा कि किसी के रंग-रुप को देखकर उपहास नहीं करना चाहिए। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को, जो भी चंद्रमा के दर्शन करेगा,उस पर झूठा आरोप लगेगा।

 

चांद की रोशनी

हालांकि अगर किसी ने गलती से इस दिन चांद देखने की गलती कर दी तो इसके लिए भी उपाय है। ऐसा करने वाला व्यक्ति इस दिन भागवत की स्यमंतक मणि की कथा सुने और पाठ करें या मौली में 21 दूर्वा बांध कर कुट बनाएं और उसे गणेश जी को पहनाएं। इसके अलावा लांछन से बचने के लिए चतुर्थी को सिद्धिविनायक का व्रत भी किया जा सकता है। भगवान श्रीकृष्ण के ऊपर जब स्यमंतक मणि को चुराने का झूठा आरोप लगा था तब उन्होंने इससे मुक्त होने के लिए यही व्रत किया था।

 

 

 

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