Hindi Diwas 2020: हिंदी दिवस का क्या है इतिहास, क्यो मनाया जाता है? सिनेमा से है गहरा नाता

हिंदी दिवस (Hindi Diwas 2020) हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। देश में पहली बार इसकी शुरुआत 14 सितंबर 1953 को हुई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका इतिहास क्या है? हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है?

By: Neha Gupta

Published: 12 Sep 2020, 07:08 PM IST

नई दिल्ली | हिंदी दिवस (Hindi Diwas 2020) का भारत में अपना ही महत्व है। हर साल 14 सितंबर को इसे मनाया जाता है। हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत कैसे हुई, इसका इतिहास क्या है ये सभी जरूरी सवाल कई लोगों के मन में उमड़ते हैं। देश में पहली बार हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था। हिंदी दिवस को मनाने की शुरुआत प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर हुई थी। हिंदी भाषा का प्रचार सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी जरूरी है।

हिंदी दिवस को 14 सितंबर को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि उस दिन हिंदी के महान साहित्यकार व्यौहार राजेन्द्र सिंह (Beohar Rajendra Simha) का भी जन्मदिन होता है। राजेंद्र प्रसाद ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। जिसके बाद सविंधान सभा ने 14 सितंबर, 1949 को सर्वसम्मति से हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाया। राजेंद्र सिंह के अलावा हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने में काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारीप्रसाद द्विवेदी और सेठ गोविन्ददास ने भी अहम भूमिका निभाई। जिस राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा सरकार से 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाए जाने का अनुरोध किया गया था। उस समिति के प्रमुख डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, सुभाषचन्द्र बोस, महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे दिग्गज थे।

हिंदी भाषा सिर्फ पढ़ाई तक ही सीमित नहीं रही बल्कि रंगमंच और फिल्मों का मुख्य आकर्षण रही। आज भी लोग कितनी भी अंग्रेजी फिल्में देख लें लेकिन हिंदी भाषा के डायलॉग्स और गाने उनको सबसे ज्यादा भाते हैं। 70 और 80 के दशक में बेहतरीन हिंदी डायलॉग्स (Hindi Dailogues) लिखे जाते थे। जैसे वक्त फिल्म का डायलॉग- जिनके घर शीशे के बने होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते। फिल्म आनंद का डायलॉग- ‘बाबू मोशाय.. जिंदगी और मौत ऊपरवाले के हाथ में है जहांपनाह’। राजेश खन्ना की आवाज में हिंदी भाषा का ये डायलॉग दर्शकों को बेहद पसंद आया था। शोल फिल्म के डायलॉग भी लोगों को खूब पसंद आए। जिसमें से एक कुछ इस प्रकार है- यहां से पचास-पचास कोस दूर जब बच्चा रात में रोता है तो मां कहती है, बेटा सो जा। सो जा नहीं तो गब्बर सिंह आ जाएगा।

Neha Gupta
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned