भारत में ही नही लंदन में भी उड़ेंगे गुलाल! हर्बल रंग बनाकर ये महिलाएं कमा रही हैं लाखों रुपये

स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पलाश के फूलों से तैयार कर रही है हर्बल रंग जिसकी डिमांड ना केवल भारत में है बल्कि विदेश के लोगों की भी यह पहली पसंद बन चुकी है।

By: Pratibha Tripathi

Published: 26 Mar 2021, 11:48 PM IST

नई दिल्ली। भारत की धरती में ऐसी कई औषधियां हैं जिनके बारे में हम अनजान होने के चलते इनका उपयोग सही तरीके से नही कर पाते। लेकिन एक जगह ऐसी है जहां पर रहने वाली महिलाओँ नें वो काम कर दिखाया है जिनके कार्यों को देख हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। इन महिलाओं ने"होली में खेले जाने वाले केमिकल रंगों को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक चीजों का उपयोग करके हर्बल रंग तैयार किया है। इसके लिए ये लोग मिलकर पलाश के फूलों को इकट्ठा करके उसका रंग और गुलाल तैयार करती हैं। जहां -जहां पर पलाश होता है। वहां पर जाकर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इस काम को अंजाम देने में लग जाती हैं। अब हर्बल रंग से तैयार किए जाने वाले गुलाल ना केवल सोनभद्र, मिजार्पुर जिले में देखने को मिलेगें बल्कि अब इस तरह का काम प्रदेश के 32 जनपदों में 4058 महिला समूहों द्वारा प्रतिदिन 5000 किलो हर्बल रंग और गुलाल बनाकर तैयार कर रहीं हैं। जिसका बिक्री लगभग 7 लाख रुपए की है।

उत्तर प्रदेश के पलाश के फूल से बने हर्बल रंग-गुलाल की महक भारत में ही नही सात समंदर पार अब विदेशों तक पहुंच चुकी है यहां के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गये हर्बल रंग गुलाल लंदन की पहली पसंद बन चुका है। अब लंदन में भी हर्बल रंग गुलाल से होली खेली जाएगी।

उप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सोनभद्र, मिजार्पुर, चंदौली, वाराणसी, चित्रकूट में कई तरह के रंगों का हर्बल गुलाल और रंग तैयार कर रही हैं। इसकी मांग पूरे भारत के अलावा लंदन में भी है। जिसके लिए आर्डर तैयार करके भेज दिया गया है।

पलाश के पुष्पों से हर्बल गुलाल रंग

सोनभद्र भीम प्रेरणा समूह की कंचन ने बताया कि हर्बल रंग को तैयार करने के लिए सबसे पहले "पलाश के पुष्पों को तोड़कर उसे एक दिन सुखाया जाता है। फिर पुष्प को पानी में दो घंटे उबालते है। जब यह अपना रंग पूरी तरह से छोड़ देता है। तब अरारोड और पलाश के पानी का रंग मिला लेते हैं। फिर इसे फैलाकर सूखा लेते हैं। इससे हर्बल गुलाल तैयार हो जाता है। इस रंग को बनाने में लागत काफी कम आती है। यह करीब 60 से 70 रुपए में तैयार हो जाता है। और बाजार में जाकर इसका दाम डबल हो जाता है। इस काम को करने में अच्छा मुनाफा होता है। इस काम को करने के लिए 11 महिलाएं हैं। जिन्होंने अभी तक 3 क्विंटल रंग तैयार किया था। जो कि सोनभद्र जिले में ही बिक गया है।"

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Pratibha Tripathi
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