ख़ौफ़नाक सच: दुनिया के दो देश, जो जानबूझकर अपने नागरिकों को बनने दे रहे हैं कोरोनावायरस का शिकार

  • हॉलैंड और स्वीडन की सरकारों ने नहीं किया लॉकडाउन
  • सामूहिक रोग प्रतिरोधक शक्ति के विकास की कोशिश
  • हॉलैंड और स्वीडन की रणनीति की आलोचना शुरू हुई

Manoj Sharma

27 Mar 2020, 12:50 PM IST

दिल्ली। कोरोनावायरस ( Coronavirus ) से पूरी दुनिया दहशत में है, लेकिन एक देश ऐसा भी है, जहां सर्दियों की मंद-मंद धूप का आनंद लेने के लिए सैकड़ों-हज़ारों लोग पार्कों में अपने परिवार के साथ बैठे हैं। दुनिया भर में लाखों लोग जानलेवा कोरोनावायरस की गिरफ्त में आ चुके हैं। हज़ारों दम तोड़ चुके हैं। घबराई सरकारों ने कहीं दो, तो कहीं पांच से ज्यादा लोगों के सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगा दिया है। कई देशों ने अगले दो-तीन हफ्तों तक करोड़ों लोगों को लॉकडाउन तक कर दिया है। फिर हॉलैंड में सार्वजनिक स्थानों पर इतनी चहल-पहल की वजह क्या है?

जनता की सामूहिक इम्युनिटी बढ़ाने की मान्यता

दरअसल हॉलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रुट्टे का मानना है कि सामाजिक दूरी ( Social distancing ) से कोरोनावायरस का विध्यवंसकारी प्रभाव लंबे समय तक बरकरार रहेगा। इसलिए डच जनता यानी कि हॉलैंड के लोगों को वायरस के सामने खुला छोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से जनता में इस वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक शक्ति का संचार होगा और देश के हालात जल्द से जल्द सामान्य हो सकेंगे। संभवत: उनकी यह मान्यता चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रोफेशनल्स ( medical professionals ) से मिली जानकारी पर आधारित है।

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हॉलैंड ने स्कूल-कॉलेज, सिनेमा हॉल नहीं किए बंद

हॉलैंड के पीएम की इसी मान्यता के चलते वहां की सरकार ने कोरोनावायरस के मंडराते ख़तरे के बीच भी स्कूल, कैफे, सिनेमा हॉल, धार्मिक स्थल और दफ्तरों को बंद नहीं किया। सार्वजनिक परिवहन भी पहले की तरह ही काम कर रहा है। वहां की जनता कहीं भी आने-जाने के लिए आज़ाद है। लोग मॉल जाकर सामान ख़रीद रहे हैं और ई-कॉमर्स कंपनियों से सामान के पैकेट भी रिसीव कर रहे हैं।

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ब्रिटेन को मजबूरी में करना पड़ा full lockdown

स्वीडन ने भी अपने नागरिकों को हॉलैंड सरकार के जैसी ही ढील दी हुई है। ब्रिटेन की सरकार ने भी पहले कोरोनावायरस के खिलाफ यही नीति अपनाई हुई थी। ब्रिटिश पीएम को भी विश्वास था कि जनता में सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता ( herd immunity ) का विकास किया जा सकता है। इसके बाद अचानक ब्रिटेन में कोरोनावायरस ने विकराल रूप धारण कर लिया और ब्रिटिश पीएम को पूरे देश में लॉकडाउन ( full lockdown ) का आदेश देना पड़ा।

कोरोनावायरस को सदा के लिए पराजित करने की रणनीति

अब केवल स्वीडन और हॉलैंड में ही हर्ड इन्युनिटी के ज़रिए कोरोनावायरस को पराजित करने की कोशिश की जा रही है। कुछ देशों ने इन दोनों ही देशों की रणनीति की आलोचना भी की है, लेकिन ये देश मानते हैं कि अभी लॉकडाउन से अगर कोरोनावायरस से बच भी गए, तो वायरस का अंत नहीं होगा। वह भविष्य में दोबारा फैल सकता है औऱ बड़ी संख्या में लोगों की मौत और देश के संस्थानों के बड़े पैमाने पर बर्बाद होने की वजह बन सकता है। यदि देश के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता इस वायरस का मुक़ाबला करने में सक्षम हो सकी, तो फिर कभी ये वायरस मानव सभ्यता के लिए ख़तरा नहीं बन सकेगा।

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Manoj Sharma Reporting
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