नई दिल्ली। पोंगल ( Pongal ) के अवसर पर तमिलनाडु ( Tamilnadu ) के विभिन्न हिस्सों में जलीकट्टू ( Jallikattu ) का आयोजन बडे धूमधाम से किया गया। इस आयोजन में तकरीबन 641 सांडों और 607 लोगों ने हिस्‍सा लिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस खेल में भाग ले रहे 641 सांडों में से 397 को कोई भी काबू नहीं कर सका।

जल्लीकट्टू तमिलनाडु का एक परंपरागत खेल है जिसे हर साल पोंगल त्योहार पर आयोजित किया जाता है। जल्लीकट्टू मट्टू पोंगल का हिस्सा है, जिसे पोंगल के तीसरे दिन खेला जाता है। तमिल में मट्टू का मतलब बैल या सांड से है।पोंगल के तीसरे दिन मवेशियों की पूजा की जाती है।

कुछ लोगों का मानना है कि जल्लीकट्टू को लगभग 2500 साल पहले से मनाया जा रहा है। इस खेल में सांडों के सींघों में नोट रखे जाते हैं। इसके बाद सांड को भड़का दिया जाता है। इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले प्रतियोगी सांडों को काबू में करते हैं।

कई बार सांडों को भड़काने के लिए उन्हें शराब पिलाने से लेकर उनकी आंखों में मिर्च भी झोंक दी जाती है, ताकि सांड को गुस्सा आ जाए और वो हिंसक हो सके। कोर्ट जल्लीकट्टू के आयोजन को रोक भी लगा चुका है लेकिन फिर भी इसमें लोग बड़ी भारी तादाद में शिरकत करते है।

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