Shimla Agreement: इंदिरा गांधी की भूल माना जाता है शिमला समझौता, जानें कैसे जीतकर हार गया भारत

  • 47 साल पहले भारत-पाक के बीच हुआ था शिमला समझौता ( Shimla Agreement )
  • अगर इंदिरा गांधी ( Indira Gandhi ) ने बरती होती सख्ती तो हल हो जाता कश्मीर ( Kashmir ) का मुद्दा

By: Priya Singh

Published: 02 Jul 2019, 05:03 PM IST

हॉट ऑन वेब

नई दिल्ली। 47 साल पहले भारत और पाकिस्तान ( Indo-Pak ) के बीच एक अहम समझौता हुआ था। माना जा रहा था कि शायद इस समझौते के बाद 1971 में हुए युद्ध के दाग धुल जाएंगे। लेकिन इस वार्ता के बाद लोगों की ज़ुबान पर सवाल था कि क्या इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी ( Indira Priyadarshini Gandhi ) का वो फैसला सही था। ये वही मौका था जिसके बारे में कहा जाता है कि भारत ने अगर सख्ती दिखाई होती तो कश्मीर का मुद्दा हमेशा के लिए हल हो जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, कश्मीर ( Kashmir ) की समस्या कम होने के बजाय बढ़ती ही चली गई। ऐसा क्यों हुआ? क्यों इस समझौते को इंदिरा गांधी ( Indira Gandhi ) की भूल माना जाता है?

बता दें कि 1971 में भारत-पाक के युद्ध के बाद दोनों देशों में एक समझौता हुआ जिसे शिमला समझौते के नाम से जाना जाता है। भारत-पाक के बीच 2 जुलाई 1972 को रात लगभग 10.30 बजे वार्ता शुरू हुई। इस वार्ता में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ( Zulfikar Ali Bhutto ) और हिंदुस्तान की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मौजूद थे।

इस समझौते के तहत जो ज़मीन भारत ने पाकिस्तान से युद्ध में जीती थी और जिन 93 हज़ार पाकिस्तानियों को भारतीय सेना ने बंदी बनाया था उन्हें छोड़ दिया गया। बदले में भारत की मांग थी की ( LOC ) यानी लाइन ऑफ कंट्रोल को इंटरनेशनल बॉर्डर ( international border ) करार किया जाए। लेकिन पाकिस्तान ने अपने नापाक इरादे दिखते हुए भारत की मांग को पूरा करने के लिए चार साल का समय मांगा। जो 47 वर्षों तक आज तक पूरा नहीं हो पाया है। पड़ोसी देश का दिल जीतने के लिए कब्जा की गई जमीन को छोड़ा गया और बंधकों को रिहा किया गया जिसके बाद सवाल यह उठता है कि बदले में हमें क्या मिला?

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